नई दिल्लीः दिल्ली के बीयर बार और रेस्तरां में शराब पीने के शौकीन लोगों के लिए अच्छी खबर है. अब उन्हें बीयर बार और रेस्तरां में बार काउंटरों पर शराब में मिलावट की आशंका से मुक्ति मिल सकती है. दरअसल, बार काउंटरों पर शराब की बोतलों की रिफिलिंग और मिलावट की शिकायतें मिल रही थीं. इसी का हवाला देते हुए दिल्ली के आबकारी विभाग ने शराब परोसने वाले बीयर बार और रेस्तरॉ को आदेश जारी किए हैं कि वे अपने काउंटर से निर्धारित समय सीमा के अंदर बिन बिके शराब के पुराने स्टॉक को ‘फर्स्ट इन फर्स्ट आउट’ के आधार पर नष्ट करते रहें. ‘फर्स्ट इन फर्स्ट आउट’ नीति के तहत पहले खरीदे गए सामानों को पहले बेचने की बात कही गई है.

शराब की दुकान से खरीदने के बाद शैंपेन और एल्कोपॉप समेत बीयर, वाइन्स को नष्ट करने की समय सीमा तीन दिन रखी गई है, जबकि व्हिस्की, जिन, वोदका, रम, स्कॉच और टकीला जैसी शराब, जिनकी अधिकतम कीमत 1,500 रुपये तक होती है, की समय सीमा पांच दिनों की रखी गई है. जिन शराब की बोतलों की कीमत 1,500 रुपये से 6,000 रुपये तक होती है, उनके नष्ट करने की समय सीमा आठ दिनों की रखी गई है.

अगर निर्धारित समय सीमा में शराब की बोतलों को नष्ट नहीं किया जाता है, तो उसे खत्म करना होगा या बार काउंटर से हटाना होगा. यह आदेश 31 अगस्त से लागू होगा और इस पर अमल नहीं करने की स्थिति में होटल बार और रेस्तरॉ के शराब लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे. इस आदेश पर नाराजगी जताते हुए बार मालिकों का कहना है कि यह विचित्र आदेश है और आबकारी विभाग के समक्ष वे इस मुद्दे को उठाएंगे.

एक होटल चेन के मालिक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, “उद्योग निकाय होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ नार्थन इंडिया (एचआरएएनआई) और अन्य बुधवार को राज्य के कर अधिकारियों से मिलेंगे.” उन्होंने आगे कहा कि यह आदेश हास्यापद है और वाणिज्यिक रूप से बेमतलब है, क्योंकि दुर्लभ व्हिस्की की एक बोतल की कीमत 1 लाख रुपये तक होती है. उन्होंने कहा कि अल्कोहल के खराब होने की कोई तिथि नहीं होती. उन्होंने कहा, “अगर इस महंगी व्हिस्की का केवल एक-तिहाई हिस्सा बिके तो क्या बाकी व्हिस्की को नष्ट कर दिया जाए?” आदेश में कहा गया है कि ऐसा रिफिलिंग और मिलावट रोकने के लिए किया गया है.