नई दिल्ली. मुस्लिमों में एक बार में तीन तलाक की प्रथा को अपराध की श्रेणी में लाने वाला तीन तलाक विधेयक को लेकर राज्यसभा में सोमवार को जमकर हंगाम हुआ. इसके बाद सदन की कार्यवाही दो जनवरी तक स्थगित कर दी गई. संसदीय कार्य राज्य मंत्री का जहां कहना है कि कांग्रेस की ओर से सेलेक्ट कमेटी में भेजने के लिए कोई नोटिस नहीं दिया गया है. वहीं, राज्यसभा की कार्यवाही लगातार बाधित रहने के लिए विपक्षी दलों ने सत्तापक्ष को दोषी ठहराया है. बता दें कि सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस ने व्हिप जारी करके अपने अपने सदस्यों से सदन में उपस्थित रहने के लिए कहा था. अन्य दलों ने भी अपने सांसदों से यह विधेयक सदन में पेश करने के दौरान उपस्थित रहने को कहा था.

कार्यवाही के दौरान हंगामे को लेकर उपसभापति हरिवंश ने कहा कि लोकसभा की कार्यवाही जारी है और चर्चा हो रही है. लेकिन उच्च सदन में लगातार हंगामा हो रहा है. इससे देश में गलत संदेश जाएगा. उन्होंने सदन के सदस्यों से निवेदन किया कि कार्यवाही को सुचारू रूप से चलने दें. बता दें कि एआईएडीएमके सांसद वेल में आकर प्रदर्शन कर रहे थे. वहीं, टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्राईन ने कहा कि बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए, इसके लिए कई विपक्षी दलों ने नोटिस भी दिया है.

संसदीय कार्य राज्यमंत्री ने ये कहा
संसदीय कार्य राज्यमंत्री गोयल ने कहा, कांग्रेस की ओर से बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने के लिए कोई नोटिस नहीं दिया गया है. कांग्रेस ने पहले इस बिल का विरोध नहीं किया था, लेकिन अब वह मुस्लिम महिलाओं के न्याय से जुड़े इस बिल को रोकने का काम कर रही है. बिल पर राजनीति की जा रही है. सदन में जोरदार हंगामा जारी है.

विपक्ष ने सत्तापक्ष पर आरोप लगाया
दूसरी तरफ विपक्ष ने राज्यसभा की कार्यवाही लगातार बाधित रहने के लिए सत्तापक्ष को दोषी ठहराया है. उच्च सदन में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद की अध्यक्षता में विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक हुई. इसमें कार्यवाही बाधित करने को लेकर सदन में स्थिति स्पष्ट करने पर चर्चा हुई. बैठक के बाद ब्रायन ने कहा कि शीतकालीन सत्र के शुरुआती 11 दिनों में राज्यसभा में औसतन 16 मिनट प्रतिदिन काम हुआ. उन्होंने अन्नाद्रमुक का नाम लिये बिना कहा कि भाजपा के तमिल सहयोगी दल सदन की बैठक 11 बजे शुरु होने के दस मिनट बाद आसन के समीप जाकर नारेबाजी शुरु कर देते हैं.