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  • 2:52 PM IST
    दीवानी वाद का फैसला सबूतों के आधार पर करना होगा और पिछले फैसले की इसमें कोई प्रासंगिकता नहीं है : न्यायमूर्ति भूषण
  • 2:52 PM IST

    न्यायमूर्ति नजीर ने बच्चियों के खतने पर न्यायालय के हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा मामले की सुनवाई बड़ी पीठ द्वारा की जानी चाहिए.
  • 2:47 PM IST
    मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग है इस विषय पर फैसला धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए होना चाहिए, उसपर गहन विचार की जरूरत है : न्यायमूर्ति नजीर
  • 2:39 PM IST

    सुप्रीम कोर्ट: फारुकी मामले का असर मुख्य केस पर नहीं

  • 2:39 PM IST

    सुप्रीम कोर्ट: 1994 के फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत नहीं

  • 2:38 PM IST

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अयोध्या मामले पर 29 अक्टूबर से सुनवाई होगी

  • 2:36 PM IST

    जस्टिस अब्दुल नजीर ने कहा- मैं साथी जजों की राय से सहमत नहीं. व्यापक परीक्षण के बिना फैसला.

  • 2:21 PM IST

    जस्टिस अब्दुल नजीर की राय बाकी दो जजों से अलग

  • 2:21 PM IST

    मस्जिद में नमाज का मामला बड़ी बेंच को नहीं

  • 2:21 PM IST

    तीन में से दो जजों का बहुमत से फैसला

नई दिल्ली. राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद मालिकाना हक विवाद पर उच्चतम न्यायालय के 1994 के फैसले पर बड़ी पीठ द्वारा पुनर्विचार करने की मांग करने वाली मुस्लिम समूह की याचिकाओं पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया. बता दें कि कोर्ट ने उस फैसले में कहा था कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति अशोक भूषण तथा न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ अपना फैसला सुनाई. पीठ ने 20 जुलाई को इसे सुरक्षित रख लिया था.

अयोध्या मामले के एक मूल वादी एम सिद्दीक ने एम इस्माइल फारूकी के मामले में 1994 के फैसले में इन खास निष्कर्षों पर ऐतराज जताया था. इसके तहत कहा गया था कि मस्जिद इस्लाम के अनुयायियों द्वारा अदा की जाने वाली नमाज का अभिन्न हिस्सा नहीं है. सिद्दीक की मृत्यु हो चुकी है और उनका प्रतिनिधित्व उनके कानूनी वारिस कर रहे हैं. मुस्लिम समूहों ने प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष यह दलील दी है कि इस फैसले में उच्चतम न्यायालय के अवलोकन पर पांच सदस्यीय पीठ द्वारा पुनर्विचार करने की जरूरत है क्योंकि इसका बाबरी मस्जिद-राम मंदिर भूमि विवाद मामले पर असर पड़ेगा.

वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने सिद्दीक के कानूनी प्रतिनिधि की ओर से पेश होते हुए कहा था कि मस्जिदें इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है, यह टिप्पणी उच्चतम न्यायालय ने बगैर किसी पड़ताल के या धार्मिक पुस्तकों पर विचार किए बगैर की. यूपी सरकार ने शीर्ष न्यायालय से कहा था कि कुछ मुस्लिम समूह ‘इस्लाम का अभिन्न हिस्सा मस्जिद के नहीं होने’ संबंधी 1994 की टिप्पणी पर पुनर्विचार करने की मांग कर लंबे समय से लंबित अयोध्या मंदिर-मस्जिद भूमि विवाद मामले में विलंब करने की कोशिश कर रहे हैं. अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने उप्र सरकार की ओर से पेश होते हुए कहा था कि यह विवाद करीब एक सदी से अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहा है.