Loan Moratorium News: कोरोना महामारी (Coronavirus Pandemic) के दौरान अगर आपने लोन मोरेटोरियम (Loan Moratorium) का लाभ लिया है तो यह खबर आपके काम की है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि शैक्षिक, आवास, उपभोक्ता, ऑटो, क्रेडिट कार्ड बकाया, पेशेवर और उपभोग ऋण पर लागू चक्रवृद्धि ब्याज को माफ किया जाएगा. Also Read - Agriculture Laws News: कृषि कानून के खिलाफ पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पेश, क्या केंद्र के लॉ को खारिज कर सकता है कोई राज्य?

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल सरकारी हलफनामे के मुताबिक सरकार 6 महीने के लोन मोरेटोरियम समय में दो करोड़ रुपये तक के लोन के ब्याज पर ब्याज की छूट देगी. इसका मतलब बैंक लोन मोरे​टोरियम (Loan Moratorium Updates) पर लगने वाले चार्ज की वसूली नहीं करेंगे. केंद्र सरकार ने हलफनामे में कहा कि कोरोना महामारी की स्थिति में ब्याज की छूट का भार वहन सरकार करे, केवल यही समाधान है. Also Read - 7th Pay Commission: दिवाली से पहले कर्मचारियों को महंगाई भत्ते का तोहफा देगी मोदी सरकार!

दरअसल, कोरोना संकट की वजह से बहुत से लोग लोन की EMI चुकाने की स्थिति में नहीं थे. इसे देखते हुए RBI के आदेश पर बैंकों से EMI नहीं चुकाने के लिए पहले तीन महीने की मोहलत दी और बाद में इसे बढ़ाकर 6 महीने कर दिया. लेकिन सबसे बड़ी समस्या मोरेटोरियम के बदले लगने वाले अतिरिक्त चार्ज को लेकर थी. केंद्र की ओर से दी राहत का मतलब ये है कि लोन मोरेटोरियम का लाभ ले रहे लोगों को अब ब्याज पर अतिरिक्त​ पैसे नहीं देने होंगे. ग्राहकों को अब सिर्फ सामान्य ब्याज देना होगा. Also Read - मध्य प्रदेशः युवती का गंभीर आरोप- '10 दिनों तक लॉकअप में रखकर 5 पुलिसकर्मी करते रहे रेप', जांच शुरू

बता दें कि बीते 28 सितंबर को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर ऋण की किस्त टालने की अवधि के दौरान बैंकों द्वारा ब्याज वसूलने पर 2-3 दिन में फैसला होने की संभावना है. शीर्ष अदालत ने टाली गई किस्तों पर ब्याज लेने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र से निर्णय को रिकॉर्ड में लाने और संबंधित पक्षकारों को हलफनामा देने को कहा था.

केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया कि इस मामले में बहुत गंभीरता के साथ विचार किया गया है और निर्णय लेने की प्रक्रिया बेहद उन्नत स्तर पर है. न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह विभिन्न उद्योगों, व्यापार संघों और व्यक्तियों द्वारा दायर याचिका की सुनवाई पांच अक्टूबर को करेगी. पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के बयान को दर्ज किया था. मेहता ने कहा था कि इस मुद्दे पर सरकार सक्रियता के साथ विचार कर रही है और इस पर दो-तीन दिनों के भीतर फैसला होने की संभावना है.