नई दिल्लीः दफ्तरों और काम के स्थलों पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के खिलाफ देश में #MeToo मूवमेंट जोरशोर से चल रहा है. पिछले कुछ सप्ताहों से यह मूवमेंट सोशल मीडिया पर यह छाया हुआ है. इस बीच इसको लेकर एक ताजा सर्वे भी आया है जिसमें कहा गया है कि हर तीन में से एक महिला कभी न कभी अपने परिचितों के हाथों यौन उत्पीड़न या छेड़छाड़ की शिकार होती हैं, लेकिन इनमें से करीब-करीब 80 फीसदी का कहना है कि उन्होंने इसको लेकर कभी भी अपने बॉस या कंपनी के एचआर में शिकायत नहीं की. इस बारे में इकोनॉमिक टाइम्स अखबार ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है.

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बेंगलुरू स्थित लोकल सर्किल्स (LocalCircles) की ओर से कराए एक ऑनलाइन पोल के मुताबिक इसमें भाग लेने वाली 32 फीसदी महिलाओं का कहना था कि उनका या उनके परिवार के किसी सदस्य का दफ्तर में यौन शोषण हुआ. इस सर्वे में 15 हजार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया जिसमें 6137 महिलाएं थीं. हर सवाल पर करीब 7000 जवाब मिले. प्रतिभागियों में से आधे (जिन्होंने बताया कि उनके साथ या उनके परिवार के किसी सदस्य का यौन उत्पीड़न हुआ) ने बताया कि उनके साथ ऐसा ऑफिस के नियमित समय के दौरान हुआ. जबकि 19 फीसदी ने कहा कि उनके साथ ऐसी हरकत ऑफिस आवर के बाद हुई. इसका मतलब यह हुआ कि 69 फीसदी मामले में ऑफिस परिसर के अंदर ही महिलाओं का यौन उत्पीड़न हुआ. इसमें शारीरिक उत्पीड़न से लेकर यौन उत्पीड़न और इस जैसी हरकतें हुईं.

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इस सर्वे से पता चलता है कि इस तरह का यौन उत्पीड़न झेलने वाली 78 फीसदी महिलाओं ने अपने दफ्तर के एचआर या बॉस से इसकी शिकायत नहीं कीं. इन आंकड़ों से पता चलता है कि वर्क प्लेस पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए सरकार की ओर से जारी विशाखा गाइडलाइन का कोई मतलब नहीं रह जाता.

इस सर्वे में प्रतिभागियों से यह पूछा गया था कि क्या उन्होंने ऑफिस में यौन उत्पीड़न का सामना किया तो उनमें से 23 फीसदी ने कहा कि वे कुछ नहीं कर सकतीं. इससे पता चलता है कि उन्हें यह पता नहीं है कि पुरुषों का किस तरह का व्यवहार यौन उत्पीड़न के दायरे में आया है, इसको लेकर महिलाएं पूरी तरह से जागरूक नहीं हैं.