नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राफेल विमान सौदा मामले में अदालत की निगरानी में जांच संबंधी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि इस सौदे की प्रक्रिया में कुछ भी संदेहजनक नहीं है. अदालत ने कहा कि विमानों की कीमत और राफेल विनिर्माण कंपनी दसॉ द्वारा ऑफसेट साझेदार चुनने की उनकी पसंद पर सवाल करना अदालत का काम नहीं है और पीठ को इस मामले में कुछ भी संदेहजनक नहीं लगा. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि रक्षा सौदे मामले में हस्तक्षेप का उन्हें कई कारण नजर नहीं आता.

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अदालत में दायर इन चारों याचिकाओं में 36 राफेल लड़ाकू विमान सौदे की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई थी. केंद्र सरकार ने इस सौदे का बचाव करते हुए कहा है कि फ्रांस की तरफ से कोई संप्रभु गारंटी नहीं है लेकिन लिखित आश्वासन मिला है. प्रशांत भूषण, अरुण शौरी, पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा, वकील एम.एल.शर्मा, विनीत दांडा और संजय सिंह द्वारा दायर याचिकाओं में अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई थी.

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रिलायंस प्रमुख अनिल अंबानी ने राफेल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे यह साबित हो गया कि उनकी कंपनी के खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित और गलत थे. रिलायंस के चेयरमैन अनिल अंबानी ने कहा कि उनकी कंपनी दसाल्ट के साथ ऑफसेट सौदे को लागू करने समेत भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है.

वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजनीति तेज हो गई है. राफेल डील पर हंगामे के बाद लोकसभा 17 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई है. इससे पहले लोकसभा में राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए राफेल डील मामले में जनता को गुमराह किया और देश की छवि को पूरी दुनिया में नुकसान पहुंचाया. उन्हें इस सदन और देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए. उन्होंने सोचा, हम तो डूबे हैं सनम, तुमको भी ले डूबेंगे.

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संसदीय कार्य मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी सदन में कहा कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को इस मामले में माफी मांगनी चाहिए. इस दौरान संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के साथ ही भाजपा के सदस्य अपने स्थान पर खड़े होकर ‘राहुल गांधी माफी मांगो’ के नारे लगाते रहे.

वहीं कांग्रेस के सीनियर नेता आनंद शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश नहीं होना चाहिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अपने आप में विरोधाभाषी है. सुप्रीम कोर्ट ने खुद कहा है कि वह इसकी डिटेल में नहीं जा सकता. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण पॉइंट पर कुछ नहीं कहा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी राफेल डील मामले में जॉइंट पार्लियामेंट कमेटी यानी जेपीसी से जांच की मांग करती रहेगी क्यों जेपीसी के पास यह अधिकार है कि वह सारे दस्तावेजों की जांच कर सकती है.