नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की 42 सीटों के लिए सात चरणों में लोकसभा चुनाव कराए जाने को लेकर विवाद बढ़ता दिख रहा है. विपक्ष ने जहां राज्य की ममता बनर्जी की सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर हमला बोला है, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि 7 चरणों में चुनाव कराने के पीछे प्रमुख वजह सुरक्षा बलों की उपलब्धता की स्थिति है. इस बीच कोलकाता के मेयर और टीएमसी नेता फिरहाद हकीम ने आरोप लगाया है कि बीजेपी चाहती है कि अल्पसंख्यक अपना वोट न डालें इसलिए रमजान के दौरान रोजे का ख्याल नहीं रखा गया.

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फिरहाद हकीम ने कहा, चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और हम उनका सम्मान करते हैं. हम उनके खिलाफ कुछ नहीं कहना चाहते, लेकिन 7 चरण का चुनाव बिहार, यूपी और पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए कठिन होगा. यह उन लोगों के लिए सबसे कठिन होगा जो उस समय रमजान के दौरान रोजा कर रहे होंगे. इन 3 राज्यों में अल्पसंख्यक आबादी काफी अधिक है. वे ‘रोजा’ देखकर वोट डालेंगे. EC को इसका ध्यान रखना चाहिए था. बीजेपी चाहती है कि अल्पसंख्यक अपना वोट न डालें, लेकिन हम चिंतित नहीं हैं. लोग ‘बीजेपी हटो-देश बचाओ’ के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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बता दें कि पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी आरिज आफताब ने रविवार को कहा कि राज्य में सात चरणों में लोकसभा चुनाव कराने के फैसले के पीछे सबसे प्रमुख वजह सुरक्षा बलों की उपलब्धता की स्थिति रही. इसके अलावा, आफताब ने कहा कि कई ‘अन्य मुद्दे’ भी थे. राज्य की विपक्षी पार्टियों का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस शासनकाल में कानून-व्यवस्था की बदहाल स्थिति के कारण सात चरणों में चुनाव कराने का फैसला किया गया है. हालांकि, सत्ताधारी तृणमूल ने आरोप लगाया कि केंद्र ने राज्य की स्थिति के बारे में चुनाव आयोग को गुमराह किया है.

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पश्चिम बंगाल में 11 अप्रैल को दो, 18 अप्रैल को तीन, 23 अप्रैल को पांच, 29 अप्रैल को आठ, छह मई को सात, 12मई को आठ और 19 मई को नौ सीटों पर मतदान कराए जाएंगे. इस बीच, तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने 12 मार्च को अपनी चुनाव समिति की बैठक बुलाई है ताकि आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर राज्य के अपने उम्मीदवारों की सूची पर फैसला कर सके. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘हमने 12 मार्च को पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के आवास पर चुनाव समिति की एक बैठक बुलाई है. हम पार्टी के उम्मीदवारों की सूची और घोषणा-पत्र पर फैसला करेंगे.

राज्य की कुल 42 लोकसभा सीटों में से 32 पर अभी तृणमूल काबिज है. आगामी चुनावों में पार्टी ने सभी 42 लोकसभा सीटों पर जीत का लक्ष्य रखा है. दूसरी ओर माकपा पोलितब्यूरो सदस्य मोहम्मद सलीम ने राज्य में पिछले साल पंचायत चुनावों के दौरान हुई हिंसा का जिक्र करते हुए कहा, ‘सात चरणों का चुनाव राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति दर्शाता है कि कैसे लोगों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने से रोका गया. सलीम ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि मतदान स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तरीके से होगा और निर्वाचन आयोग निष्पक्ष, सक्रिय तथा जवाबदेह होगा.