मोदी सरकार को फिर से सत्ता में आने से रोकने के लिए पूरे देश में महागठबंधन की चर्चा चल रही है. लोकसभा सीटों के लिहाज से उत्तर प्रदेश बड़ा राज्य है. यूपी जीते बिना देश में सरकार नहीं बन सकती. 2014 के चुनाव में बीजेपी ने लोकसभा की 80 सीटों में से 71 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया था. यही कारण है कि वह अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में कामयाब रही. 2014 में मोदी लहर पर सवार बीजेपी की चमक खो रही है. लोकसभा के उपचुनावों में विपक्ष के एक साथ आने से बीजेपी को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तक की सीटें गंवानी पड़ी. बीजेपी की हार का सिलसिला कैराना लोकसभा के उपचुनाव तक जारी रहा. Also Read - सुभाषचंद्र बोस के धर्मनिरपेक्ष विचारों के खिलाफ थे RSS के लोग, BJP को जयंती मनाने का अधिकार नहीं: कांग्रेस

विपक्ष को पता चल गया है कि अगर बीजेपी को सत्ता में आने से रोकना है तो उन्हें अपने मतभेद भुला साथ आना ही होगा. यूपी में तीन बड़ी पार्टियां बीएसपी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस अगर साथ आ गईं तो बीजेपी को रोकना आसान हो जाएगा. तीनों पार्टियां भी यही चाहती हैं लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर बात बिगड़ सकती है. ऐसे में सवाल ये है कि सीटों का बंटवारा किस आधार पर हो.2014 का चुनाव सीटें के बंटवारे का आधार नहीं हो सकता क्योंकि वह विपक्ष के लिए एक ऐसी सुनामी थी जिसे हर नेता भुलना चाहेगा. फिर सीटों के बंटवारे का आधार क्या हो. एक नजर डालते हैं पिछले दो लोकसभा और दो विधानसभा चुनाव में तीनों पार्टियों के प्रदर्शन पर. Also Read - भाजपा सांसद साक्षी महाराज का विवादित बयान, बोले- नेताजी को कांग्रेस ने मरवाया

2017 विधानसभा चुनाव
2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 2014 का लोकसभा वाला प्रदर्शन दोहराया. बीजेपी को 300 से ज्यादा सीटें मिलीं. वहीं 39.7.35 प्रतिशत वोट मिले. समाजवादी पार्टी को 28 प्रतिशत जबकि बीएसपी को 22.2 प्रतिशत वोट मिले. इस चुनाव में सपा और कांग्रेस ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. कांग्रेस को 6.3 प्रतिशत वोट मिले. कांग्रसे ने 105 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. वोट प्रतिशत में कमी का एक कारण यह भी है कि कांग्रेस ने गठबंधन की वजह से 300 सीटों पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारे. Also Read - West Bengal: PM मोदी के पहुंचने से पहले बवाल, हावड़ा में BJP कार्यर्ताओं पर हमला, TMC वर्कर्स पर आरोप

2014 लोकसभा चुनाव
2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 71 सीटें मिलीं वहीं वोट प्रतिशत की बात करें तो उसे 42.63 प्रतिशत वोट मिले. इस चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन अबतक के सबसे निचले स्तर पर चला गया. पार्टी तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के अलावा एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं हो पाई थी. मायावती की बीएसपी को 19.77 प्रतिशत वोट मिले लेकिन पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई. वहीं समाजवादी पार्टी ने 5 सीटें जीती थीं और उसे 22.35 प्रतिशत वोट मिले.

2012 विधानसभा चुनाव
उत्तर प्रदेश के 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 11.65 प्रतिशत, बीएसपी को 25.9 प्रतिशत वहीं एसपी को 29.1 प्रतिशत वोट मिले थे. 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने अकेले अपने दम पर सरकार बनाई थी.

2009 लोकसभा चुनाव
इस लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को 23 सीटों के साथ 23 प्रतिशत वोट मिले, बीएसपी को 20 सीटों के साथ 27.42 प्रतिशत वोट मिले. कांग्रेस ने 18.25 प्रतिशत वोट के साथ 21 सीटें जीती थीं. तीनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था.

कैसे तय होंगी सीटें
अगर 2009 के चुनाव के नतीजों को आधार बनाकर तीनों पार्टियां कांग्रेस,बीएसपी और एसपी सीटों का बंटवारा करें तो बात बन सकती है. इस चुनाव में तीनों पार्टियों ने लगभग एकसमान वोट प्रतिशत और एक समान सीटें हासिल की थीं. 2017 का विधानसभा चुनाव और 2014 का लोकसभा चुनाव सीटों के बंटवारे का आधार इसलिए नहीं बन सकता क्योंकि तीनों पार्टियों को पता है कि इन दोनों चुनावों में मोदी लहर के कारण उनकी नाव डूबी. विधानसभा चुनाव का प्रदर्शन भी इसलिए सीटों के बंटवारे का आधार नहीं बन सकता क्योंकि 29 साल से राज्य की सत्ता से दूर कांग्रेस को यह मंजूर नहीं होगा.