नई दिल्ली: पिछले कुछ समय के तनावपूर्ण संबंधों के बीच, सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल बीजेपी और शिवसेना ने सोमवार को आगामी लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ने की घोषणा कर दी. महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों में से बीजेपी 25 पर और शिवसेना 23 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. दोनों पार्टियां इस साल प्रस्तावित 288 सदस्यीय राज्य विधानसभा में बराबर बराबर सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगी. इस एलान से पहले जब शिवसेना ने अपने दम पर सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषाणा की थी तो टिकट के दावेदार जिसमें मंत्री भी शामिल थे ने चुनावी मैदान में बीजेपी से लड़ाई के लिए कमर कस ली थी. अब जब दोनों पार्टियों ने एकसाथ चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है शिवसेना के लिए इन नेताओं से पार पाना बड़ी चुनौती है. इनमें से कई बागी भी हो सकते हैं.

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जालना में बीजेपी के रावसाहेब पाटिल के खिलाफ चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे अर्जुन खोटकर का कहना है कि वह बीजेपी के सामने दोस्ताना लड़ाई का प्रस्ताव रखेंगे. खोटकर ने बताया कि हमें दो साल पहले चुनाव की तैयारी शुरू करने के लिए कहा गया था. उसके अनुसार वह निर्वाचन क्षेत्र में प्रचार कर रहे थे. अब जब गठबंधन हो गया है मैं उद्धव साहब से पूछूंगा कि आगे क्या करना है. वहीं ग्रामीण महाराष्ट्र के एक विधायक ने शिवसेना-बीजेपी के एक साथ चुनाव लड़ने को राजनीतिक आत्महत्या करार दिया.

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शिवसेना के कार्यकर्ताओं को संदेह है कि दोनों पार्टियों के बीच वोट ट्रांसफर हो पाएगा. उनका कहना है कि हमारे कार्यकर्ता परेशान हैं. वे अब तक बीजेपी के खिलाफ प्रचार कर रहे थे. अब वे अब उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर कैसे वोट मांग सकते हैं? एक अन्य नेता ने दावा किया कि शिवसेना अगर अकेले चुनाव लड़ती तो ज्यादा फायदा मिलता. कांग्रेस के पूर्व विधायक रामप्रसाद बोरदीकर की बेटी मेघना साकोर-बोरदीकर ने कहा कि वह परभणी से भाजपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही थीं, जो शिवसेना के संजय (बंधु) जाधव के पास है. उन्होंने स्वीकार किया कि कार्यकर्ताओं की ओर से दबाव है कि वे सेना के खिलाफ चुनाव लड़ें.

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पालघर सीट को लेकर दोनों पार्टियों के बीच खींचतान चल रही है. पालघर के 8 मंडल प्रमुखों ने इस्तीफा दे दिया था. यह लोकसभा सीट फिलहाल पार्टी के पास है, उसे आगामी चुनावों से पहले होने वाले गठबंधन के तहत शिवसेना को दिया जा सकता है.इस सीट का प्रतिनिधित्व पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता चिंतामन वनगा कर रहे थे लेकिन उनके निधन के बाद पिछले साल मई में हुए पालघर उपचुनाव में भाजपा एवं शिवसेना के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली थी. भाजपा के उम्मीदवार राजेंद्र गवित ने शिवसेना के उम्मीदवार एवं चिंतामन वनगा के बेटे श्रीनिवास वनगा को हरा कर इस सीट पर जीत हासिल की थी.