नई दिल्ली: 17वीं लोकसभा के चुनाव की तारीखों का एलान हो चुका है. पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को है, वहीं 19 मई को सातवें और अंतिम चरण का चुनाव होगा. नतीजे 23 मई को आएंगे. लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव में 90 करोड़ मतदान हिस्सा लेंगे. यानी 90 करोड़ वोटर्स अगली सरकार चुनेंगे. बहुमत के लिए 272 सीटों की जरूरत होती है. लोकसभा सीटों के लिहाज से देश के 6 बड़े राज्य उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश हैं. इन राज्यों में लोकसभा की 278 सीटें आती हैं, जिस पार्टी ने इन राज्यों को साध लिया उसकी सरकार बनना तय है. Also Read - सत्ता में रहते हुए भारत की तकदीर और तस्वीर बदलना ही BJP का लक्ष्य: जेपी नड्डा

उत्तर प्रदेश
लोकसभा की सबसे ज्यादा सीटें इसी राज्य से आती हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए ने 80 में से 73 सीटें जीती थीं. बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में यूपी का अहम योगदान था, लेकिन इस बार राज्य के समीकरण बदले-बदले नजर आ रहे हैं.सपा बसपा और आरएलडी ने गठबंधन कर लिया है. इस गठबंधन से एनडीए को जबरदस्त टक्कर मिल रही है. दूसरी तरफ कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ रही है. उसने प्रियंका गांधी के रूप में अपना तुरुप का पत्ता चला है. अगर कांग्रेस सभी 80 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारती है तो इससे नुकसान बीजेपी को ही होगा. यूपी में एनडीए के अन्य सहयोगी अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी हैं. हालांकि अब तक एनडीए में सीटों का बंटवारा नहीं हो पाया है. हाल ही में आए सर्वे में भी एनडीए को नुकसान होता दिख रहा है. वहीं गठबंधन लगभग 50 सीटें जीतता दिख रहा है. Also Read - बिहार में कांग्रेस विधायक संतोष मिश्रा के भतीजे की गोली मारकर हत्या, हमलावरों ने बरसाईं अंधाधुंध गोलियां

महाराष्ट्र
शिवसेना से गठबंधन के बाद बीजेपी मजबूत स्थिति में दिख रही है. महाराष्ट्र की 48 सीटों के लिए एनडीए और यूपीए में मुकाबला देखने को मिलेगा. एक तरफ शिवसेना और बीजेपी हैं वहीं दूसरी ओर कांग्रेस, एनसीपी और अन्य पार्टियां चुनावी मैदान में है. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 23 और शिवसेना ने 18 सीटों पर जीत हासिल की थी. वहीं कांग्रेस को दो और एनसीपी को 4 सीटें मिली थी. एक सीट एसडब्ल्यूपी ने जीती थी. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 25 और शिवसेना 23 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. यहां एनडीए मजबूत स्थिति में दिख रहा है. Also Read - गुलाम नबी आज़ाद ने की PM मोदी की तारीफ़ तो बजी तालियाँ, कहा- वो चाय बेचते थे, कम से कम अपनी...

पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल में मुकाबला ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी से है.2014 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने 34 सीटें जीती थीं. अगर कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां साथ आती हैं तो यहां त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है. मोदी लहर के दौरान भी राज्य में सिर्फ दो सीटें जीतने वाली बीजेपी अपनी टैली में सुधार करना चाहती है. वहीं लेफ्ट अपनी खिसकती जमीन को बचाने में जुटा है. 2014 के मुकाबले बीजेपी का प्रदर्शन सुधरता दिख रहा है. हालांकि बीजेपी जो लक्ष्य लेकर चल रही है उससे अभी वह कोसों दूर दिख रही है. हाल ही में आए सर्वे भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं.

बिहार
बिहार में मुकाबला एनडीए और यूपीए के बीच है. नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के एनडीए का हिस्सा बनने से बीजेपी मजबूत हुई है. 2014 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू ने एनडीए का साथ छोड़ दिया था लेकिन एक बार नीतीश कुमार बीजेपी के खेमें में आ गए हैं. जेडीयू और बीजेपी 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं वहीं रामविलास पासवान की पार्टी एलजेपी 6 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए ने बिहार में 31 सीटें जीती थीं. हालांकि उस समय उपेंद्र कुशवाहा एनडीए का हिस्सा थे लेकिन इस बार वह यूपीए के खेमें में चले गए हैं. दूसरी ओर यूपीए के खेमें में लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी, कांग्रेस, उपेंद्र कुशवाहा की राष्टीय लोकसमता पार्टी, जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा और अन्य पार्टी हैं. हालांकि अब तक सीटों का बंटवारा नहीं हो पाया है. कुल मिलाकर यहां भी एनडीए खेमा मजबूत स्थिति में दिख रहा है.

तमिलनाडु
तमिलनाडु की 39 सीटों के लिए मुकाबला एनडीए वर्सेस यूपीए है. बीजेपी ने एआईडीएमके के साथ गठबंधन किया है. बीजेपी यहां 5 सीटों पर चुनाव लड़ेगी वहीं पीएमके 7 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि एआईडीएमके कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी. दूसरी और यूपीए के खेमे में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) 20 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, बाकी की 20 सीट (पुडुचेरी की एक सीट) सहयोगियों को आवंटित की गई है. कांग्रेस को तमिलनाडु में नौ और पुडुचेरी में एक सीट, एमडीएमके को एक लोकसभा सीट व एक राज्यसभा सीट, माकपा, भाकपा, वीसीके (प्रत्येक लोकसभा की एक सीट पर) और आईयूएमएल, आईजेके व केडीएमके को लोकसभा की एक-एक सीट दी गई है. तमिलनाडु में यूपीए मजबूत स्थिति में दिख रही है.

मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश की 29 सीटों के लिए मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच है. दिसंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी. हालांकि वह पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर पाई थी, लेकिन राज्य में सरकार बनाने में सफल रही थी. बड़े राज्यों में मध्य प्रदेश ऐसा राज्य है जहां सीधा मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच है. राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद पार्टी की स्थिति मजबूत हुई है, लेकिन यह कहना मुश्किल है कि वह बीजेपी को कितनी कड़ी टक्कर दे पाएगी. विधानसभा चुनाव में बीजेपी को कांग्रेस से ज्याद वोट मिले थे. दोनों पार्टियों में सीटों का अंतर भी बहुत कम था. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 29 में 26 सीटों पर जीत हासिल की थी. वहीं कांग्रेस को सिर्फ तीन सीटों से संतोष करना पड़ा था.