लखनऊ: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनावों में हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने आगामी लोकसभा चुनाव 2019 के लिए नई रणनीति के तहत काम करने का फैसला किया है. तीन राज्‍यों में हार की भरपाई के लिए भाजपा की नजर अब दक्षिण और पूर्वोत्तर के राज्‍यों पर है. क्‍योंकि पूर्वोत्‍तर के राज्‍यों में कांग्रेस की जमीन उखड़ चुकी है. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनवरी के आखिर तक दक्षिण-पूर्व की 122 सीटों को कवर करती हुई दो दर्जन से अधिक रैलियां करेंगे. माना जा रहा है कि अब भाजपा का लक्ष्‍य केरल, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में ज्‍यादा से ज्‍यादा सीटें हासिल करने का है, ताकि लोकसभा चुनाव में अगर तीन राज्‍यों में सीटें कम भी होती हैं तो उसकी भरपाई दक्षिण-पूर्वोत्‍तर राज्‍यों की जीत से पूरी हो सके.

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इकोनॉमिक्‍स टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने गुरुवार को पार्टी मुख्यालय में सभी राज्य इकाइयों के बीजेपी के केंद्रीय पदाधिकारी, राज्य इकाई अध्यक्षों और सामान्य सचिवों (संगठन) के साथ बैठक की. इस दौरान उन्‍होंने कहा कि मध्‍यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की हार उन्हें आगामी लोकसभा चुनाव में फतह से रोक नहीं सकती है, लेकिन जनता ने जो जनादेश दिया है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए. शाह ने यह भी जोर दिया कि बीजेपी को मिले वोटों के प्रतिशत से साफ है कि लोगों का विश्‍वास बीजेपी पर बना हुआ है.

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2013-14 वाले रूप में नजर आएंगे पीएम मोदी
2019 के लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर 2013-14 वाले रूप में नजर आएंगे. पार्टी सूत्रों ने कहा कि अगले हफ्ते से वह(पीएम मोदी) उन क्षेत्रों में सीटों को कवर करने के लिए रैलियों को संबोधित करेंगे, जहां बीजेपी ने कभी जीत दर्ज नहीं की है. ये सीटें मुख्य रूप से दक्षिण भारत (कर्नाटक को छोड़कर), ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और पूर्वोत्तर में स्थित हैं. सबसे पहले पार्टी द्वारा निर्धारित किए गए 122 लोकसभा सीटों पर एक अभियान के तहत कवर किया जाएगा, जो कि जनवरी के अंत तक पूरा हो जाएगा. इस दौरान प्रत्येक जनसभा में 2-5 सीटें शामिल होने की संभावना है. इस लिस्ट में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की दो-दो सीटों, असम की सिल्चर और डिब्रूगढ़ सीट, केरल की 17 से 18 सीटों, तमिलनाडु, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की 42 में से 40 सीटों को शामिल किया गया है. इसके अलावा पूर्वोत्तर की उन सीटों को शामिल किया गया है, जहां आज तक भारतीय जनता पार्टी की विजय नहीं हो सकी है.