नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने रांची में आयोजित एक कार्यक्रम में आरक्षण को लेकर बयान दिया है. चार दिवसीय ‘लोकमंथन’ कार्यक्रम के आखिरी दिन रविवार को अपने समापन संबोधन में महाजन ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने सिर्फ 10 वर्ष के लिए आरक्षण लागू करने की बात कही थी, लेकिन यहां हर 10 वर्ष बाद उसे फिर से 10 वर्ष या 20 वर्ष के लिए बढ़ा दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि केवल आरक्षण से देश का उद्धार नहीं होने वाला.लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आरक्षण का लाभ लेने वाले लोगों को आत्मचिंतन करना चाहिए कि खुद के विकास हो जाने के बाद उन्होंने समाज को क्या कुछ दिया.

सुमित्रा महाजन ने कहा कि जब हम सामाजिक समरसता की बात हम करते हैं, तब हमें आत्मचिंतन और आत्मनिरीक्षण करना चाहिए. जिन्हें आरक्षण का लाभ मिला उन्हें भी और जिनको नहीं मिला उन्हें भी. आज हमारी सामाजिक स्थिति क्या है. हो सकता है मुझे आरक्षण मिला. मैं उस समाज से आ रही हूं और मैं अगर जीवन में कुछ बन गई तो मुझे सोचना चाहिए मैंने समाज को कितना दिया. मैंने समाज को साथ में लेकर कितना सहारा दिया है. यह सोचना बहुत जरूरी है और यह सामूहिक रूप से सोचना पड़ेगा. जब हम समाज और प्रजातंत्र की बात करते हैं तो सोचना पड़ेगा. क्या मेरा समाज पिछड़ तो नहीं गया. मैं तो आगे बढ़ गई, क्या उसका फायदा उन्हें मिला. क्या आरक्षण की यही कल्पना है.

सुमित्रा महाजन ने कहा कि वह बोलने में डगमगाती नहीं हैं क्योंकि उनके विचार पक्के हैं. डॉ. अंबेडकर ने जो कहा था वही दोहरा रही हैं. हमें आरक्षण केवल 10 साल के लिए चाहिए. लोकसभा अध्यक्ष ने आगे कहा, डॉ. अंबेडकर की कल्पना थी 10 साल बाद सामूहिक उत्थान की. उनकी कल्पना थी सामाजिक समरसता की. लेकिन हमने क्या किया. हर 10 साल में आरक्षण को आगे बढ़ाते गए. एक बार तो 20 साल आगे बढ़ाया गया. क्या केवल आरक्षण देने से देश का उद्धार हो जाएगा.

उन्होंने कहा कि दुनिया भारतीय संस्कृति को सम्मान की नजर से देखती है, ‘लेकिन क्या हम इस ओर देख रहे हैं कि यह आत्मनिरीक्षण का मामला है.’ लोकसभा अध्यक्ष ने इस लोकमंथन में बुद्धिजीवियों द्वारा भारत के निर्माण पर तीन दिन तक विचार मंथन करने की प्रशंसा की जिसका ध्येय वाक्य जन गण मन है.उन्होंने प्रदर्शनकारियों द्वारा सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाये जाने पर अफसोस प्रकट किया कहा कि वे ऐसा कर करदाताओं के पैसे की बर्बादी करते हैं, ‘इस विषय पर ‘राष्ट्रभावना होनी चाहिए.’

महाजन ने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू द्वारा लोकमंथन के उद्घाटन के मौके पर दिये गये भाषण का हवाला दिया जिन्होंने कहा था कि राष्ट्र सबसे पहले आना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘लोगों को जन गण और मन (लोग, समाज और मस्तिष्क) के बारे में सोचना चाहिए. लोगों को देश के इतिहास और साहित्य के बारे में जानना चाहिए.’ महिलाओं के विषय में उन्होंने कहा, ‘महिलाओं के सम्मान का बड़ा महत्व है. महिलाएं समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उनके बगैर समाज आगे नहीं बढ़ेगा.