नई दिल्ली: लंदन की अदालत ने भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के भारत प्रत्यर्पण की मंजूरी दे दी है. इस मामले को लेकर सोमवार को लंदन की वेस्टमिन्स्टर कोर्ट ने सुनवाई की. माल्या को भारत लाने के लिए सीबीआई के नेतृत्व में दो सदस्यीय टीम लंदन गई हुई थी. भारत सरकार काफी समय से माल्या के प्रत्यर्पण की कोशिश में लगी हुई थी. विजय माल्या दो मार्च, 2016 को भारत से भागा था.

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ठप खड़ी किंगफिशर एयरलाइंस के प्रमुख रहे 62 वर्षीय माल्या पर करीब 9,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और धन शोधन का आरोप है. पिछले साल अप्रैल में प्रत्यर्पण वॉरंट पर गिरफ्तारी के बाद से माल्या जमानत पर है. सीबीआई ने इस मामले में कहा कि उम्मीद है विजय माल्या को जल्द से जल्द भारत लाकर केस को आगे बढ़ाया जाएगा. हमने उसे भारत लाने के लिए काफी मेहनत की. हम इस केस को लेकर कानूनी रूप से मजबूत स्थिति में थे क्योंकि हमारे पास तथ्य थे. इसलिए हमें यकीन था कि विजय माल्या के प्रत्यर्पण में हमें कामयाबी मिलेगी.

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वहीं, माल्या ने अपने खिलाफ मामले को राजनीति से प्रेरित बताया है. हालांकि, माल्या ने ट्वीट कर कहा, ‘‘मैंने एक भी पैसे का कर्ज नहीं लिया. कर्ज किंगफिशर एयरलाइंस ने लिया था. दुखद कारोबारी विफलता की वजह से यह पैसा डूबा है. गारंटी देने का मतलब यह नहीं है कि मुझे धोखेबाज बताया जाए.’ माल्या ने कहा कि मैंने मूल राशि का 100 प्रतिशत लौटने की पेशकश की है. इसे स्वीकार किया जाए. माल्या के खिलाफ प्रत्यर्पण का मामला मजिस्ट्रेट की अदालत में पिछले साल चार दिसंबर को शुरू हुआ था.