नई दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने एक इंटरव्यू में कहा है कि कश्मीरी अगर पत्थर की जगह गोली चलाएंगे तो हमारे लिए बेहतर है. तब हम वो करेंगे जो करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि मानव ढाल का इस्तेमाल करने वाले मेजर गोगोई का सम्मान करना सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए जरूरी था. बिपिन रावत ने कहा कि लोगों में सेना का भय खत्म होने पर देश का विनाश हो जाता है. विरोधियों के साथ आपके लोगों में भी सेना का डर होना चाहिए.

जनरल बिपिन रावत की ये तीन बातें किस तरफ इशारा कर रही हैं. उनकी बातों से देश के सर्वोच्च सैनिक की बजाए एक राजनेता जैसा स्वर निकल रहा है. क्या इस लकीर पर चलकर कश्मीर की समस्या का समाधान संभव है?

मेजर गोगोई का सम्मान जरूरी
सेना प्रमुख ने कहा कि कोर्ट ऑफ इन्क्वॉयरी के बीच मेजर लुतुल नितिन गोगोई का सम्मान जरूरी था. उन्होंने कहा कि मैं अपने जवानों का मनोबल नहीं गिरने दे सकता. यह सही है कि जनरल रावत जवानों के प्रति बेहद चिंतित और उनका मनोबल बढ़ाने के लिए संकल्पित हैं लेकिन मेजर गोगोई का बचाव करना उनकी किसी उद्देश्य को पूरा नहीं करता. ऐसी घटनाएं देश और विदेश में आर्मी की प्रतिष्ठा को बट्टा ही लगाएंगीं. इससे घाटी के हालात भी और बिगड़ेंगे. अब यह समझ से परे है कि सेना प्रमुख इस घटना का किस बुनियाद पर बचाव कर रहे हैं.

दोस्त और दुश्मन सभी को आर्मी से डरना चाहिए
जनरल रावत ने कहा कि लोगों में सेना का भय खत्म होने पर देश का विनाश हो जाता है. विरोधियों के साथ-साथ अपने लोगों को भी सेना से डरना चाहिए. जनरल रावत का यह बयान हैरान करने वाला है. उनकी इस बात पर एक सीधा सा सवाल उठता है कि सेना देश के लोगों में सुरक्षा की भावना के लिए होती है या उनके मन में डर पैदा करने के लिए!

कश्मीरी पत्थर की बजाए गोली चलाएं तो बेहतर
सेना प्रमुख का यह बयान की अगर कश्मीरी हम पर गोली चलाएंगे तो बेहतर होगा. तब हम वो कर पाएंगे जो करना चाहते हैं. इस बयान पर सवाल उठने लाज़िमी हैं. क्या हम कश्मीर को बिना कश्मीरियों के चाहते हैं? क्या अब कश्मीर का समस्या का समाधान सिर्फ गोलीबारी ही रह गया है. बिपिन रावत लंबे समय से कश्मीर पर काम करते रहे हैं इसलिए भी उनका यह बयान निराशाजनक है.

दशकों से भारत के राजनेताओं की शर्मनाक नीतियों की वजह से आज कश्मीर समस्या ने बेहद गंभीर रुख अख्तियार कर लिया है. मोदी सरकार ने कश्मीर के हालात सुधारने के लिए भारतीय सेना को काफी छूट दे रखी है. केंद्र सरकार ने सेना से सभी जरूरी क़दम उठाए जाने को कहा है. लेकिन बिपिन रावत के हालिया बयान देखकर कहा जा सकता है कि देश का सेना प्रमुख भी जब राजनेताओं की भाषा बोलने लगे तो कश्मीर समस्या के समाधान की बहुत उम्मीद नहीं रखी जानी चाहिए.

*यह लेखक के अपने विचार हैं