Telangana में इस बार ये चुनावी मुद्दे रहे हाबी, जनता किस पर करेगी भरोसा?

एग्जिट पोल में तेलंगाना में कांग्रेस और बीआरएस के बीच कड़ी टक्कर है. कुछ एग्जिट पोल कांग्रेस की सरकार बनने का दावा भी कर रहे हैं. आइए जानते हैं राज्यों में चुनावी मुद्दे क्या-क्या हाबी रहे.

Published date india.com Updated: December 1, 2023 1:28 PM IST
Telangana में इस बार ये चुनावी मुद्दे रहे हावी, जनता किस पर करेगी भरोसा?

तेलंगाना में 30 नवंबर को वोटिंग के बाद अब सभी लोगों की निगाहें 3 दिसंबर को होने वाले चुनाव नतीजों का इंतजार कर रहे हैं. तेलंगाना में पिछले 10 साल से BRS (पहले टीआरएस) की सरकार है. बीजेपी और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने तेलंगाना में ताबड़तोड़ चुनाव प्रचार किया. चुनाव प्रचार में जनता से जुड़े कई मुद्दे हावी रहे. आइए जानते हैं यहां पर प्रमुख रूप से क्या चुनावी मुद्दे थे.

नागरिक बुनियादी ढांचा

सत्तारूढ़ बीआरएस ने हैदराबाद को वैश्विक शहर में बदलने का दावा करती रही है, लेकिन राज्य की राजधानी में जल जमाव की समस्या एक बड़ी समस्या रही है. मानसून के मौसम में लोगों के नालों में बहने की घटनाएं भी हुई हैं. विपक्ष ने इस मुद्दे को जनता के बीच उठाया और जलजमाव की परेशानी दूर करने का वादा किया है.

बेरोजगारी

तेलंगाना में बेरोजगारी एक प्रमुख मुद्दा रहा है. इसी वजह से बीजेपी और कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में नौकरी सृजन को भी शामिल किया. बीजेपी और कांग्रेस ने जनता से वादा किया है कि सरकार बनने पर बेरोजगारों को नौकरी दिया जाएगा.

निर्वतमान मंत्री और बीआरएस नेता के टी रामा राव ने कहा कि राज्य में आईटी उद्योग में कर्मचारियों की कुल संख्या 2014 में तीन लाख से बढ़कर लगभग नौ लाख हो गई है. उन्होंने आगे कहा कि हैदराबाद ने आईटी नौकरियां पैदा करने में बेंगलुरु को पीछे छोड़ दिया है. हालाँकि, रिपोर्टों के अनुसार, तेलंगाना औपचारिक क्षेत्र के रोजगार की सीमित उपलब्धता से जूझ रहा है. भाजपा और कांग्रेस दोनों ने राज्य के लिए अपने चुनावी घोषणापत्र में नौकरियों के सृजन का वादा किया है.

कल्याणकारी योजनाएं

कृषि ऋण से लेकर मुफ्त एलपीजी सिलेंडर और वंचित लोगों को वित्तीय सहायता तक, तेलंगाना में पार्टियों ने अपने चुनाव घोषणापत्र में कई कल्याणकारी योजनाएं शामिल कीं. कल्याणकारी योजनाओं की गारंटी और इन योजनाओं के कार्यान्वयन से तेलंगाना के राजनीतिक परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की संभावना है.

किसानों का मुद्दा

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चुनाव में किसानों का मुद्दा भी हावी रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों एक रैली के दौरान निज़ामाबाद में एक राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड की स्थापना की घोषणा की. ऐसे बोर्ड की स्थापना राज्य के किसानों की लंबे समय से मांग रही है. सभी तीन प्रमुख दलों बीआरएस, भाजपा और कांग्रेस ने किसानों को सत्ता में आने पर कई मुफ्त की चीजें देने की घोषणा की है.

क्या कहते हैं एग्जिट पोल

बता दें कि ज्यादातर एग्जिट पोल में कांग्रेस को बढ़त दिखाई गई है. वहीं, सत्तारूढ़ बीआरएस को दूसरे और बीजेपी को तीसरे नंबर पर बताया गया है. हालांकि यह एक महज अनुमान है. असली नतीजे 3 दिसंबर को ही पता चलेंगे.

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