लुई बर्जर रिश्वतखोरी कांड के सिलसिले में गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत बुधवार को राज्य पुलिस की अपराध शाखा के समक्ष पेश हुए। मार्गो निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस विधायक कामत ने इससे पहले एक बयान में खुद को बेगुनाह करार दिया और कहा कि वह लुई बर्जर के किसी अधिकारी से नहीं मिले थे। Also Read - पीएम मोदी का दुनिया को भरोसा- भारत की टीका उत्पादन क्षमता पूरी मानवता को इस संकट से बाहर निकालेगी

उल्लेखनीय है कि लुई बर्जर के शीर्ष अधिकारियों ने जल एवं सीवरेज परियोजना का ठेका पाने के लिए 976,630 डॉलर रिश्वत देने की बात स्वीकार कर ली है। इस परियोजना को जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी ने फंडिंग की थी। Also Read - पीएम मोदी और राजपक्षे के बीच हुई वार्ता, भारत ने कहा- अल्पसंख्यक तमिलों की हो सत्ता में भागदारी

कामत ने कहा, “जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) परियोजना से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। उसकी फाइल मेरे पास नहीं आई थी।” Also Read - UN में इमरान के 'कश्मीर राग' पर भारत का करारा जवाब- 'PoK पर अवैध कब्जा खाली करो'

जेआईसीए परियोजना मामले में अपराध शाखा ने एक महत्वपूर्ण अधिकारी आनंद वाचासुंदर को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है और रिश्वतखोरी के इस मामले में पूर्व लोक निर्माण मंत्री चर्चिल अलेमाओ से दो बार पूछताछ की चुकी है।

लुई बर्जर के शीर्ष अधिकारियों ने भारत, वियतनाम, इंडोनेशिया और कुवैत जैसे एशियाई देशों में ठेके हासिल करने के लिए 39 लाख डॉलर रिश्वत देने का दोष स्वीकार कर लिया है।

अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा घोषित दस्तावेजों में हालांकि रिश्वत स्वीकारने वाले राजनीतिज्ञों और अधिकारियों के नाम नहीं हैं, लेकिन दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि गोवा के एक मंत्री और अन्य अधिकारियों को 2009-10 में 976,630 डॉलर की रिश्वत दी गई थी।

लुई बर्जर उस कंर्सोटियम का हिस्सा थी, जिसने गोवा में अरबों डॉलर की एक जल एवं सीवरेज परियोजना के क्रियान्वयन का ठेका हासिल किया था। इस परियोजना को जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी ने फंडिंग की थी।