नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि बंबई हाई कोर्ट में सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में सुनवाई करने वाले न्यायाधीश को बदलने पर सवाल खड़े नहीं होने चाहिए क्योंकि रोस्टर में बदलाव ‘‘नियमित’’ प्रक्रिया है जो वहां स्थापित परंपरा के अनुरूप है. शीर्ष अदालत ने यह उस समय कहा जब विशेष सीबीआई न्यायाधीश बी. एच. लोया की कथित रहस्यमयी मौत की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका दायर करने वाले बंबई लॉयर्स एसोसिएशन ने दलील दी कि सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में अपीलें सुनने से बंबई हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे को हटाने के प्रयास हुए हैं.Also Read - सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने कहा- अदालतों पर भरोसे का संकट, लोगों को न्याय मिलना चाहिए

Also Read - Noida में 10 साल से अधिक पुराने डीजल और 15 साल से ज्‍यादा पुराने पेट्रोल वाहन होंगे जब्त, ये प्रशासन का प्‍लान

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि आपकी दलील संभवत: सही नहीं है. बंबई हाई कोर्ट में यह नियमित प्रक्रिया है जो वहां स्थापित परंपरा का हिस्सा है. हर आठ दस सप्ताह में रोस्टर बदलता है और किसी न्यायाधीश को आधा सुना गया मामला सुनने की अनुमति नहीं है. Also Read - सुप्रीम कोर्ट पहुंचा 'कोरोना माता मंदिर' का मामला, याचिकाकर्ता पर लगा जुर्माना

यह भी पढ़ें- जज लोया के बेटे ने कहा- पिता की मृत्यु को लेकर कोई संदेह नहीं है, पहले था

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि वह बंबई हाई कोर्ट में सेवाएं दे चुके हैं और वहां रोस्टर में बदलाव की परंपरा जानते हैं, यह देश की अन्य उच्च न्यायालयों के लिए सामान्य बात नहीं है.

जज लोया की मौत की स्वतंत्र जांच हो: अधिवक्ता संघ

द बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने सोमवार को शीर्ष अदालत को बताया कि दिवंगत न्यायाधीश बी.एच. लोया के परिवार को यह कहने के लिए मजबूर किया गया होगा कि वे उनकी मौत के मामले की जांच दोबारा नहीं चाहते, लेकिन मौत के इर्द-गिर्द जो संदेहास्पद परिस्थितियां सामने आई हैं, उससे स्वतंत्र जांच करवाना न्यायसंगत है. वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने न्यायाधीश लोया की मौत के संबंध में उस समय की घटनाओं को सिलसिलेवार पेश करते हुए प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की पीठ को बताया कि लोया की मौत के इर्द-गिर्द की परिस्थितियां संदेह पैदा करती हैं.

भाषा इनपुट