नई दिल्ली| मालेगांव बम धमाके के आरोपी पूर्व मिलिटरी इंटेलिजेंस ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित 9 साल बाद बुधवार को जेल से बाहर आ गए. सुप्रीम कोर्ट से जमानत के बाद पुरोहित गुरुवार को मुंबई के स्पेशल एनआईए कोर्ट पहुंचे.


हालांकि कर्नल पुरोहित ने ड्यूटी जॉइन कर लिया है लेकिन उन पर अनुशासनात्मक और निगरानी प्रतिबंध लागू रहेगा मतलब कि वह निलंबन के तहत यूनिट में रहेंगे. फिलहाल उनको किसी सक्रिय ड्यूटी पर नहीं तैनात किया जाएगा. दूसरी तरफ पुरोहित ने ड्यूटी ज्वाइन करने के पहले दिन ही 15 दिन की छुट्टी मांगी है. उनकी छुट्टी पर क्या फैसला लिया गया फिलहाल इसकी जानकारी नहीं मिल सकी है.


पुरोहित की जमानत के साथ कुछ शर्तें भी जुड़ी हुई हैं. वह कोर्ट के आदेश के बिना देश नहीं छोड़ सकेंगे. उनका पासपोर्ट कोर्ट के पास जमा होगा. अगर कोर्ट की ओर से निर्देश मिला तो पुरोहित को पेश होना पड़ेगा. इसके अलावा, जांच के संदर्भ में एनआईए की मदद भी करनी होगी. कोर्ट ने पुरोहित से यह भी कहा है कि वह इस मामले से जुड़े किसी भी गवाह से दूरी बरतें.

बता दें कि महाराष्ट्र के नासिक जिले में सांप्रदायिक दृष्टि से संवेदनशील मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को हुए बम विस्फोट में 7 लोग मारे गए थे. मालेगांव की हमीदिया मस्जिद के नजदीक एक मोटरसाइकल पर रखे बम में धमाका हुआ था. केस की शुरुआती जांच महाराष्ट्र एटीएस ने की. बाद में एनआईए ने जांच का जिम्मा संभाला. ब्लास्ट केस के बाद से ही कर्नल पुरोहित जेल में थे. पुरोहित पर बम सप्लाई का आरोप था.

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पुरोहित की जमानत मंजूर की. इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुरोहित की जमानत याचिका ठुकरा दी थी. इस मामले में दूसरी आरोपी साध्वी प्रज्ञा को भी जमानत मिली हुई है और प्रज्ञा की जमानत भी पुरोहित को मिली जमानत का एक आधार बनी. हालांकि एनआईए ने कर्नल पुरोहित की जमानत का विरोध किया था.