नई दिल्ली: लखनऊ में एक हिंदू-मुस्लिम दंपति को नियम से परे जाकर तत्काल पासपोर्ट जारी करने को लेकर कुछ लोग पिछले कुछ दिनों से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की कड़ी निंदा कर रहे हैं. जब से ये पूरा विवाद हुआ है तबसे विदेश मंत्री सुषमा स्वराज देश में नहीं थीं बल्कि वो विदेश दौरे पर थीं. रविवार को भारत लौटते ही सुषमा स्वराज ने इस पूरे मामले पर कहा कि उनके पीछे क्या हुआ उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है. हालांकि उन्होंने विरोध करने के नाम पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाले ट्रोल्स को भी कड़ा जवाब दिया. Also Read - Visa Free Destination For Indians: घूमने के हैं शौकीन तो बिना वीजा झंझट के करें इन देशों की यात्रा, जानें कौन से हैं वो खूबसूरत देश

विदेश मंत्री ने ट्वीट किया, ”मैं 17 से 23 जून 2018 के बीच भारत से बाहर थी. मैं नहीं जानती कि मेरी अनुपस्थिति में क्या हुआ. हालांकि मुझे कुछ ट्वीट से सम्मानित किया गया. मैं इसे आपके साथ साझा कर रही हूं. इसलिए मैंने उन्हें पसंद किया है.” Also Read - पति के पासपोर्ट पर बॉयफ्रेंड को ऑस्ट्रेलिया घुमाने ले गई महिला, घर लौटे पति को नहीं मिली, फिर...

एक हिंदू – मुस्लिम दंपति को पासपोर्ट जारी करने को लेकर हुए विवाद में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्विटर पर ट्रोल किया गया था और उनके खिलाफ गाली – गलौज वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया था. इसे लेकर भी सुषमा स्वराज ने जवाबी हमला बोला है. उन्होंने ट्रोल्स को इशारों ही इशारों में चेतावनी दे दी है.

क्या है पूरा मामला?
पिछले हफ्ते लखनऊ में एक हिंदू-मुस्लिम दंपति ने आरोप लगाया था कि जब वो लखनऊ स्थित पासपोर्ट ऑफिस में पासपोर्ट बनवाने के लिए गए तो पासपोर्ट सेवा केंद्र के एक अधिकारी विकास मिश्र ने उनसे धर्म के नाम पर बदसलूकी की और उनपर धर्म बदलने का दबाव बनाया.

आरोप लगाने वाली महिला तन्वी सेठ ने कहा कि उन्होंने एक मुसलमान से शादी की है लेकिन वो हिंदू ही है लेकिन पासपोर्ट ऑफिस में उनसे अपना धर्म बदलने के लिए बोला गया. मीडिया में ये मामला आते ही आरोपी अधिकारी विकास मिश्र का लखनऊ से तब तबादला कर दिया गया था.

विकास मिश्र ने क्या कहा?
पासपोर्ट अधिकारी विकास मिश्र ने अपने बचाव में कहा है कि वह धर्मनिरपेक्ष हैं, विकास ने कहा कि जब उन्होंने तन्वी के कागजों की जांच की तो उन्हें पता लगा कि तन्वी के निकाहनामा में उनका नाम शाजिया अनस दिखाया गया है, लेकिन जब उन्होंने तन्वी से पूछा कि क्या उन्होंने कभी अपना नाम बदला है तो तन्वी ने मना कर दिया.

ऐसे में तन्वी का बयान और उनके कागज आपस में मैच नहीं कर रहे थे जिस वजह से उन्होंने पूछताछ की लेकिन उल्टा उनपर ही आरोप लगाया गया. विकास मिश्र ने मीडिया से कहा ‘‘दंपति ने पूछताछ से इनकार कर दिया. अगर उन्होंने सहमति दी होती तो हम डाटा संशोधन के लिए इसे A सेक्शन को भेज देते.

हमें देखना है कि कौन व्यक्ति किस नाम से पासपोर्ट ले रहा है. यह एक दस्तावेजी साक्ष्य है, कैसे हम उसकी अनदेखी कर सकते हैं. मैं धर्मनिरपेक्ष हूं और मैंने खुद अंतरजातीय विवाह किया है.’’

सोशल मीडिया पर छिड़ा युद्ध
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने नियमों से परे जाकर तत्काल पासपोर्ट जारी करने को गलत बताया और विकास मिश्र के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सुषमा स्वराज और उनके मंत्रालय पर हमला बोला. लोगों का कहना था कि मिश्र सिर्फ अपना काम कर रहे थे. लेकिन विरोध करते करते कुछ लोग भाषा की मर्यादा लांघ गए और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करने लगे.

कांग्रेस ने दिया साथ
ट्रोल्स को जवाब देने के सुषमा स्वराज के फैसले का कांग्रेस पार्टी ने भी समर्थन किया है. कांग्रेस ने कहा कि स्थिति चाहे कैसी भी हो लेकिन डर, गुस्सा और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कभी भी सही नहीं हो सकता. सुषमा जी हम आपके निर्णय का स्वागत करते हैं.