लखनऊ: लोकसभा चुनावों में मिली हार के बाद कांग्रेस में अब तक समीक्षा बैठकों का दौर जारी है. इसके लिए बैठकें तो हो रही हैं, लेकिन इन बैठकों में नेताओं के बीच न सिर्फ सामंजस्य की कमी है, बल्कि महत्वपूर्ण बैठकों में भी पार्टी के दिग्गज नेता अपनी मौजूदगी दर्ज नहीं करा रहे हैं. एक दिन पहले लखनऊ में कांग्रेस महासचिव व पश्चिमी यूपी के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया पार्टी के नेताओं के साथ हार और 2022 की चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चा करने पहुंचे. बैठक में लोकसभा चुनाव लड़ने वाले कांग्रेस के 28 प्रत्याशी व कुछ स्थानीय नेता तो पहुंच गए, लेकिन उत्तर प्रदेश कांग्रेस में हनक रखने वाले श्रीप्रकाश जायसवाल, सलमान खुर्शीद, इमरान मसूद, जितिन प्रसाद जैसे नेता इस मीटिंग में ही नहीं पहुंचे.

मीटिंग में पहुंचे चुनाव हारने वाले प्रत्याशियों में इसे लेकर असंतोष व्याप्त हो गया. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की खबर के अनुसार इनका कहना है कि जब यहां मीटिंग होनी थी, ठीक उसी समय दिल्ली में भी एक मीटिंग हो गई. कई लोग वहां चले गए. आखिर मीटिंग एक ही समय क्यों रखी गई. इसी तरह के सामंजस्य की कमी ही बड़ी समस्या बनी हुई है. साथ ही यह भी दर्शाता है कि पार्टी के नेता एक दूसरे के प्रति कितने गंभीर हैं. मीटिंग में पहुंचे कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस तरह का ‘क्लास डिफरेंस’ ही कांग्रेस की बड़ी समस्या बना हुआ है.

वहीं, मीटिंग लेने पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि कांग्रेस को राज्य में मजबूत किया जाएगा और 2022 का विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ने की तैयारी की जाएगी. ज्योतिरादित्य ने यहां लोकसभा सीटवार समीक्षा के बाद पत्रकारों को बताया, “कांग्रेस को मजबूत करना हमारी एकमात्र प्राथमिकता है. 2022 का विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ने की तैयारी करेंगे.” प्रियंका गांधी को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाए जाने के सवाल पर सिंधिया ने कहा कि इसका फैसला नेतृत्व ही करेगा.

सिंधिया ने कहा, “जो चुनाव परिणाम सामने आए हैं, बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं हैं. कार्यकर्ताओं की राय लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी. अब कार्यकर्ताओं को हार-जीत का चक्कर छोड़कर मिशन 2022 के लिए लगना होगा.” उपचुनाव के बारे में उन्होंने कहा, “अगले चरण में उपचुनाव की एक-एक सीट के बारे में स्थानीय नेतृत्व से चर्चा करके प्रत्याशियों के बारे में फैसला किया जाएगा. बूथ स्तर तक संगठन के पुनर्गठन के बारे में निर्णय लेंगे. अच्छे प्रत्याशियों को आगे करके फैसला लिया जाएगा.”

इससे पहले सिंधिया ने करीब साढ़े छह घंटे तक लोकसभा सीटवार चुनावी नतीजों की समीक्षा की. उन्होंने दो-दो लोकसभा सीटों की एक साथ बैठक की. इसमें प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर और सिंधिया से संबद्ध दोनों सचिव रोहित चौधरी और धीरज गूर्जर मौजूद थे. बैठकों में जिला-शहर अध्यक्षों ने बाहरी प्रत्याशियों द्वारा स्थानीय संगठन से तालमेल न करने की बात कही. प्रदेश प्रवक्ता अशोक सिंह ने बताया, “प्रत्याशी चयन में स्थानीय संगठन की कोई राय नहीं ली जाती और प्रत्याशी ऊपर से थोप दिए जाते हैं. जमीन पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी होती है. चुनाव के समय बाहरी लोगों को बढ़ावा देने का खमियाजा भी पार्टी को भुगतना पड़ता है. इसीलिए इस बार चुनाव में अपने मूल कार्यकर्ताओं की बात सुनी जाए.”