नई दिल्ली| लुधियाना से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। दरअसल यहां के एक जिला अदालत ने जमीन अधिग्रहण के मामले में ऐसा फैसला सुनाया है जिसे सुनकर सभी हैरान हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे की ओर से जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजा न मिलने पर 45 वर्षीय किसान संपूर्ण सिंह ने कोर्ट में अपील की थी। इस पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस और लुधियाना स्टेशन को पीड़ित किसान के नाम कर दिया जाए।

ये मामला 2007 में लुधियाना-चंडीगढ़ रेलवे लाइन के निर्माण से जुड़ा है। कोर्ट ने रेलवे लाइन के अधिग्रहित की गई जमीन का मुआवजा 25 लाख प्रति एकड़ से बढ़ाकर 50 लाख प्रति एकड़ कर दिया था। इसके बाद संपूर्ण सिंह को मुआवजे में 1 करोड़ 47 लाख मिलना था, लेकिन रेलवे ने उसे मात्र 42 लाख रुपये दिए। मुकदमे की सुनवाई 2012 में शुरू हुई थी और फैसला 2015 में आया। फिर भी रेलवे ने मुआवजा नहीं दिया। इसके बाद किसान ने फिर से कोर्ट गया, जिसके बाद लुधियाना जिला और सत्र जज ने यह फैसला सुनाया।

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कोर्ट के आदेश के बाद संपूर्ण सिंह तकनीकी रूप से स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस के मालिक तो बन गए हैं। लेकिन जब वे अपने वकील के साथ ट्रेन पर कब्जा लेने वकील के साथ स्टेशन पहुंचे तो उन्हें रोक दिया गया। रेलवे के सेक्शन इंजीनियर ने बताया कि ये ट्रेन कोर्ट की संपत्ति है। बाद में किसान के वकील ने ट्रेन के ड्राइवर को कोर्ट का आदेश थमाया और नोटिस चस्पा कर दिया।

इसके बाद ट्रेन अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गई। किसान संपूर्ण सिंह का कहना है कि यात्रियों को परेशानी न हो इसलिए ट्रेन को नहीं रोका। कोर्ट के अधिकारियों ने 18 तारीख तक का समय रेलवे विभाग को दिया है। उधर, किसान के वकील का कहना है कि मुआवजे की रकम नहीं मिली तो कोर्ट से कुर्क की गई रेलवे की संपत्ति की नीलामी की सिफारिश की जाएगी।