नई दिल्लीः कहते हैं कि शिक्षा और ज्ञान हासिल करने की कोई उम्र नहीं होती. इसे साबित किया है यहां एक मां बेटे ने जिन्होंने एक साथ 10वीं की परीक्षा की तैयारी की. 44 साल की रजनी बाला ने 1989 में 9वीं की परीक्षा पास की थी, लेकिन परिवारिक कारणों से उन्हें आगे की पढ़ाई छोड़नी पड़ी. इसके बाद उनकी शादी हो गई और उन्होंने दांपत्य जीवन शुरू कर दिया.

रजनी ने बताया कि मेरे पति ने मुझे 9वीं के आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए कई बार बोला. मेरे तीन बच्चे हैं और उन तीनों को मैंने पढ़ाया है. रजनी ने बताया कि एक वॉर्ड अटेंडेंट के रूप में सिविल हॉस्पिटल में काम करती हूं. मुझे लगा कि आज के समय में कम से कम 10वीं पास करना जरूरी है. इसके बाद मैंने अपने बेटे के साथ तैयारी शुरू कर दी वह भी 10वीं क्लास में है. हम साथ स्कूल गए और एकसाथ पढ़ाई की.

सास ने भी दिया साथ
रजनी ने बताया कि जब मैंने 10वीं परीक्षा देने की प्लानिंग की तो मेरी सास, पति और बच्चों ने मेरा पूरा साथ दिया. रजनी ने बताया कि सफलता हासिल करने के लिए मैंने कड़ी मेहनत की है. सुबह 4 से रात 11 बजे तक पढ़ाई से लेकर घर के कामकाज में उनके पति पूरा सहयोग दे रहे हैं. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि उसकी 2 बेटियां ग्रैजुएशन पूरी कर चुकी हैं और बेटा 10वीं की परीक्षा दे रहा है.

वह और उसका बेटा दीपक दोनों ही मिलकर परीक्षा की तैयारी करते हैं और दोनों ही ट्यूशन पढ़ने भी जाते हैं. उन्होंने बताया कि शुरू-शुरू में तो छोटे बच्चों के बीच में बैठकर पढ़ना कुछ अजीब सा लगा लेकिन अब वह बेहद खुशी महसूस कर रही हैं. रजनी ने बताया कि उनके पेपर बहुत अच्छे हो रहे हैं.

रजनी ने बताया कि उनकी सास एजुकेटेड नहीं हैं लेकिन उन्होंने मुझे पढ़ाई के लिए प्रेरित किया. मेरे पति ने भी मेरा पूरा साथ दिया. वो मुझे और मेरे बेटे को पढ़ाने के लिए जल्दी उठ जाते हैं. मेरी बेटियां भी पढ़ाई में मेरी हेल्प करती हैं. उन्होंने बताया कि वह ग्रेजुएशन करना चाहती हैं.

पति भी कम नहीं
रजनी के पति राजकुमार का कहना है कि आज की दुनिया में हर किसी का शिक्षित होना बहुत जरूरी है. राजकुमार ने बताया कि उन्होंने खुद 17 साल बाद ग्रेजुएशन पूरी की थी. मुझे लगता है कि अगर मैं कर सकता हूं तो मेरी पत्नी भी कर सकती है. उन्होंने बताया कि पढ़ाई के लिए हम तीनों मां-बेटे और मैं जल्दी उठ जाते हैं. उन्होंने बताया कि मां-बेटे साथ स्कूल जाने के अलावा ट्यूशन भी एक साथ जाते हैं.

लाजवंती सिनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल पवन गौर का कहना है कि एक लंबे समय बाद फिर से पढ़ाई पूरी करने की इच्छा दिखाना और बिना किसी हिचक के उस दिशा में आगे बढ़ना एक अच्छी बात है. इससे समाज में भी एक अच्छा मैसेज जाएगा.