नागपुर. नागपुर में डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) के प्रोजेक्ट ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट में कार्यरत वैज्ञानिक निशांत अग्रवाल पर पाकिस्तान और आईएसआई को तकनीकी सूचना लीक करने और जासूसी का आरोप है. रिपोर्ट के मुताबिक, 30 हजार डॉलर प्रति महीने की आईटी जॉब के लिए निशांत ने ये कदम उठाया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा की रहने वाले सेजल कपूर से निशांत फेसबुक पर लगातार चैट करता था. सेजल ने उसे लिंक्डइन पर चैट करने के लिए इनवाइट किया और बताया कि वहां वह उनके सीनियर्स से भी चैट कर सकते हैं. जैसे ही उसने लिंक को क्लिक किया एक मालवेयर उसके कंप्यूटर में डाउनलोड हो गया. इसी के जरिए कुछ डेटा निशांत के कंप्यूटर से चला गया था.

फेसबुक पर करता था चैट
पूछताछ में निशांत ने बताया कि वह नेहा शर्मा से भी फेसबुक पर हमेशा चैट करता रहता था. नेहा के लिंक पाकिस्तान से जुड़े हुए थे. सूत्रों के अनुसार, निशांत के पास कोई सबूत नहीं हैं कि उसके कंप्यूटर से कितने संवेदनशील डेटा चोरी हुए हैं. इस मामले में एटीएस के अधिकारी डीआरडीओ के दूसरे कर्मचारियों से भी पूछताछ कर रहे हैं.

ट्रांजिट रिमांड की बात
यूपी पुलिस का कहना है कि जासूसी के आरोप में गिरफ्तार ब्रह्मोस इंजीनियर निशांत अग्रवाल फेसबुक पर नेहा शर्मा और ‘पूजा रंजन’ नाम से चल रहे दो फर्जी एकाउंट के जरिए पाकिस्तान के संदिग्ध खुफिया सदस्यों से संपर्क में था. उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) ने मंगलवार को यहां जूनियर मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी एस.एम. जोशी की अदालत में अग्रवाल को विस्तृत पूछताछ के लिए लखनऊ ले जाने के लिए उसकी ट्रांजिट रिमांड की मांग करते हुए यह बात कही.

ये हैं आरोप
महाराष्ट्र एटीएस की ओर से पेश अतिरिक्त लोक अभियोजक एस जे बागडे ने कहा कि अदालत ने यूपी एटीएस के लिए तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर की. आरोपी पर शासकीय गोपनीय अधिनियम, भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. यूपी के लखनऊ में एटीएस सूत्रों ने सोमवार को कहा था कि नागपुर स्थित उसके आवास से एक कम्प्यूटर जब्त किया गया है जिससे गोपनीय दस्तावेज मौजूद हैं. सूत्रों ने कहा कि अग्रवाल के रुड़की स्थित आवास से एक पुराना कम्प्यूटर भी जब्त किया गया है और इसकी सामग्री की जांच की जा रही है.

जांच अधिकारी ने ये कहा
जांच अधिकारी ने कहा, ”ये सब शीर्ष गोपनीय सूचनाएं हैं जिन्हें अगर साझा किया जाए तो यह देश के लिए खतरा हो सकता है. हम विस्तृत पूछताछ करके उन्हें लखनऊ की विशेष अदालत में पेश करना चाहते हैं और इसलिए तीन दिन के ट्रांजिट रिमांड का आग्रह किया जाता है.”

चार साल से कर रहा था काम
निशांत अग्रवाल चार सालों से ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट के प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे. उन्हें युवा वैज्ञानिक पुरस्कार भी मिल चुका है.उनके फेसबुक अकाउंट पर इसकी तस्वीर भी है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी कुरुक्षेत्र से इंजीनियरिंग कर चुके निशांत आईआईटी रूड़की में रिसर्च इंटर्न रह चुके हैं.

रूस से है समझौता
ब्रह्मोस एयरोस्पेस का गठन भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के ‘मिलिट्री इन्डस्ट्रीयल कंसोर्टियम’ (एनपीओ मशिनोस्त्रोयेनिया) के बीच संयुक्त उद्यम के रूप में किया गया है. भारत और रूस के बीच 12 फरवरी, 1998 को हुए एक अंतर-सरकारी समझौते के माध्यम से यह कंपनी स्थापित की गई थी.