नई दिल्ली. अंतरिम सीबीआई प्रमुख एम नागेश्वर राव ने एक निजी कंपनी में अपनी पत्नी के निवेश में अनियमितताओं से मंगलवार को इनकार किया. साल 1986 बैच के ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी राव ने अपने हस्ताक्षरित बयान में कहा कि उनके और उनकी पत्नी मन्यम संध्या द्वारा किए सभी लेनदेन और निवेश की जानकारी सक्षम अधिकारियों को दी गई है और सभी का उल्लेख सरकार को अनिवार्य रूप से दिए जाने वाले वार्षिक संपत्ति ब्यौरे में किया गया है.

राव ने उन रिपोर्टों से इनकार करते हुए कहा कि उनकी पत्नी ने आंध्र प्रदेश के गुंटूर में अचल संपत्ति खरीदने के लिए ‘एंजेला मर्केंटाइल प्राइवेट लिमिटेड‘ से 25 लाख रुपए का रिण लिया था जो मेरे पुराने दोस्त प्रवीण अग्रवाल की कंपनी है. उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को अंतरिम सीबीआई प्रमुख के नीति संबंधी निर्णय लेने पर रोक लगा दी और सीलबंद लिफाफे में उनके प्रशासनिक फैसलों की जानकारी मांगी.

सीबीआई के अंतरिम प्रमुख
सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेजने के बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच होने तक राव को पिछले हफ्ते सीबीआई का अंतरिम प्रमुख बनाया गया. राव ने मामले पर विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि संपत्ति उनकी पत्नी ने अपने रिश्ते के भाई डॉ आर के राणा बाबू के साथ मिल कर 18 सितंबर 2010 को खरीदी थी. उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी ने इसके करीब एक वर्ष बाद विरासत में मिली कृषि भूमि के कुछ एकड़ 30.72 लाख रुपए में बेचा और दो महीने बाद कुछ और भूमि 27.90 लाख रुपए में बेची.

ये रहे आंकड़े
उन्होंने कहा, इस तरह वर्ष 2011 में विक्रय आय से उसे 58.62 लाख रुपए मिले। 1.38 लाख रुपए (निजी बचत) के साथ कुल 60 लाख रुपए वर्ष 2011 में ‘एंजेला मर्केंटाइल प्राइवेट लिमिटेड‘ को भेजे गए. उसने रिण में ली गई राशि काटने के बाद बचे 35 लाख रुपए को निवेश के तौर पर बनाए रखा गया. राव ने कहा कि निवेश के तीन साल से कुछ कम समय बाद जुलाई 2014 में कोलकाता आधारित कंपनी ने उन्हें 41.33 लाख रुपए लौटाए जिनमें 6.33 लाख रूपये का ब्याज शामिल है.