मुंबई: केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने यहां शनिवार को कहा कि देश में स्मार्ट शहर परियोजना की सफलता के लिए एक सक्षम भौतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्थानिक अवसंरचना आवश्यक है। ‘स्मार्ट सिटी : डिलिवरी ऑफ सिविक सर्विसिस’ विषय पर यहां विज्ञान भारती द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए नायडू ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि कोई स्मार्ट शहर किसी नागरिक को सेवाओं की आपूर्ति के जरिए कैसे लाभ पहुंचाएगा। यह भी पढ़े:वाराणसी : साइकिल सवार से एक लाख रुपये लूटे

नायडू ने कहा कि नागरिक सेवाओं में लोगों की दैनिक जरूरतें शामिल हैं और स्मार्ट शहरों के लिए वे शहरी इलाकों की आवश्यकताओं से संबंधित हैं, जिन्हें कई हस्तक्षेपों के जरिए स्मार्ट बनाना होगा।

नायडू ने कहा कि लेकिन शहरी और ग्रामीण जीवन में बहुत अंतर है। नायडू ने कहा, “नियोजित शहरीकरण की अनुपस्थिति में नागरिकों को अनावश्यक रूप से अपने घर से काम के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और अन्य स्थानों, भूमि एवं मकानों की लागत आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही है। गरीब शहरीकरण के लाभों से वंचित होते जा रहे हैं।”

इन चुनौतियों का जिक्र करते हुए नायडू ने कहा कि स्मार्ट शहरों में ऐसी पारस्थितिकी होनी चाहिए जो दैनिक जीवन के हरेक पहलू में सुधार कर, अवसंरचना अभाव को पूरा कर तथा बेहतर जीवन के लिए सभी आवश्यक सेवाओं की गुणवत्ता और आपूर्ति बढ़ाकर शहरों और कस्बों को अधिक रहने योग्य बनाए। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में 48,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत शहरी विकास की योजनाओं को और 500 शहरों के लिए अटल मिशन फॉर रिजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांस्फार्मेशन को 50,000 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ मंजूरी दी थी।