नई दिल्लीः मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए बुधवार को मतदान होने वाले हैं. इस बीच सबकी नजर राज्य के महाकौशल इलाके की आदिवासी सीटों पर है. यह क्षेत्र इसलिए भी ज्यादा अहमियत रखता है, क्योंकि कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के प्रदेशाध्यक्ष इसी इलाके से आते हैं. कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ छिंदवाड़ा से हैं तो प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह भी इसी इलाके से आते हैं.

महाकौशल इलाके में आठ जिले हैं. यहां विधानसभा की कुल 38 सीटें हैं. पिछले कुछ चुनावों से जमीनी स्तर पर संघ के कार्यकर्ताओं की पहुंच बढ़ने के कारण इस इलाके में भाजपा मजबूत रही है. 2013 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 38 में से 22 सीटों पर जबकि 2008 के चुनाव में 24 सीटों पर जीत हासिल की थी. वैसे कमलनाथ अपने क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हैं और वह लगातार 9वीं बार छिंदवाड़ा से सांसद बनने में कामयाब रहे हैं. जो भी इस बार परिदृश्य बदले हुए दिख रहे हैं.

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जबलपुर में कड़ा मुकाबला
सबसे कड़ा मुकाबला जबलपुर में दिख रहा है. इस क्षेत्र के इस सबसे बड़े जिले में विधानसभा की आठ सीटें हैं. यह भाजपा का गढ़ रहा है. पिछले विधानसभा में यहां की आठ में से छह सीटों पर भाजपा ने परचम लहराया था. वैसे इस बार यहां से कांग्रेस, भाजपा को कड़ी टक्कर दे रही है. यहां बिजली मीटर और नर्मदा में प्रदूषण बड़ा मुद्दा है और कांग्रेस पार्टी ने इसे प्रभावी तरीके से उठाया है. इलाके में डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारी का फैलना भी मुद्दा है. यहां तक कि राज्य के स्वास्थ्य मंभी शरद जैन यहीं से हैं और उनके जबलपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में लोग इस बीमारी के कारण मारे गए हैं.

शिवराज नहीं विधायकों से लोग नाराज
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इसी तरह कांग्रेस छिंदवाड़ा, मंडला, शहडोल, सिवनी और नरसिंहपुर में भी मजबूत दिख रही है, वहीं आदिवासी बहुल बालाघाट में वह अंतर्कलह से जूझ रही है. इन इलाकों में एक मुख्य मुद्दा भाजपा के मौजूदा विधायकों से लोगों का उब जाना है.

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बातचीत में मतदाता मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नीतियों और योजनाओं को लेकर बिल्कुल नाराज नहीं दिखे, लेकिन वे अपने विधायकों के गायब रहने से जरूर परेशान हैं. भाजपा इलाके में व्याप्त एंटी इनकम्बेंसी को पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के कार्यकाल की याद दिलाकर दबाने की रणनीति पर चल रही है. इलाके में भाजपा का रेडिया जिंगल ‘याद है दिग्विजय की कांग्रेस सरकार? वो दिन वापस मत लाइए’ से शुरू होता है. पुराने लोगों पर ये जिंगल काफी प्रभावी दिख रहा है. वैसे युवा मतदाताओं को दोनों दलों ने लक्षित किया है, लेकिन युवा दिग्विजय सिंह के कार्यकाल को याद नहीं करना चाहते. सिवनी के एक टैक्सी ड्राइवर सोनू का कहना है कि उन्हें दिग्विजय सरकार याद भी नहीं है. उनके पिता उनसे कहते हैं कि उन्होंने (दिग्विजय सिंह) राजनीतिक वनवास ले लिया था.

मंडला और बालाघाट में आदिवासी लोग नाखुश दिख रहे हैं. उनकी शिकायत है कि उनके इलाके में पर्याप्त विकास नहीं हुआ. इलाके की सड़कों की मरम्मत की जा रही थी. एक पूर्व पंचायत सचिव ने कहा कि बरसात के मौसम के बाद से ही इलाके की सड़कें खराब हैं.