मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद उसके करिश्माई नेता शिवराज सिंह चौहान की भूमिका को लेकर अकटलें लगाई जाने लगी हैं. नवंबर 2005 में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे शिवराज राज्य में भाजपा के सबसे लोकप्रिय नेता हैं. उन्हें राज्य में ‘मामा’ के नाम से जाना जाता है. उन्होंने बिना किसी खास विवाद के राज्य में 13 सालों तक शासन किया. लेकिन इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली मात के बाद पार्टी के सामने अगले चुनाव को देखते हुए नेतृत्व का संकट सताने लगा है. कुछ महीनों में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं.Also Read - महाराष्ट्र सरकार के मंत्री ने कहा- कांग्रेस के बिना विपक्षी एकता संभव नहीं, सब एकजुट हों

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वैसे पार्टी के भीतर शिवराज के विरोधी भी इसी बात को लेकर पार्टी नेतृत्व की आलोचना करते रहे हैं कि एक ही नेता पर पूरा दाव लगाया जाता रहा है. हमारे सहयोगी डीएनए अखबार में वरिष्ठ पत्रकार अभिलाष खांडेकर की एक रिपोर्ट छपी है. इस रिपोर्ट के मुताबिक मालवा क्षेत्र के भाजपा के कद्दावर नेता सत्यनारायण सत्तन खुलेआम पार्टी नेतृत्व की आलोचना कर रहे हैं. उनका कहना है कि समय रहते राज्य में दूसरी पीढ़ी के नेताओं को तैयार नहीं किया गया. हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया. इसी तरह भाजपा में कई अन्य नेता हैं जो सत्ता जाने के बाद मुखर हो रहे हैं. उनका कहना है कि आज राज्य में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को छोड़कर शिवराज की जगह लेने वाला कोई चेहरा नहीं है जिसे पार्टी का नेतृत्व दिया जा सके. Also Read - 75 साल से आर्टिकल 370 के रहते जम्मू कश्मीर में शांति क्यों नहीं थी? : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूछा

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उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती पहले भी उत्तर प्रदेश चली गई हैं. सुमित्रा महाजन लोकसभा की स्पीकर हैं. सुषमा स्वराज ने चुनावी राजनीति से दूर होने का फैसला किया है. इसके अलावा 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाले 27 सांसदों में कोई ऐसा नहीं है जो 15 साल बाद मिली जीत के कारण ऊर्जा से भरपूर कांग्रेस को मुकाबला दे सके.

राज्य की राजनीति के जानकारों का कहना है कि आज प्रदेश भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है. शिवराज अब थके दिख रहे हैं. उनका करिश्मा भी अब पहले जैसा नहीं रहा. उनके राज्य में कई घोटाले हुए. ऐसे में कुछ ही महीनों में होने जा रहे लोकसभा चुनाव को देखते हुए पिछले 15 साल में भाजपा प्रदेश स्तर पर नेतृत्व के संकट से जूझेगी.

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शिवराज का रिकार्ड

चौहान राज्य में लंबे समय तक शासन करने वाले मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं. 2004 में उमा भारती के नेतृत्व में भाजपा को मिली जीत और उसके बाद पैदा हुए राजनीतिक संकट की स्थिति में शिवराज को ताज मिला था. उमा भारती के इस्तीफे के बाद बाबूलाल गौड़ को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया था, लेकिन 2005 में पार्टी नेतृत्व ने उनको हटाकर शिवराज को ताज सौंपने का फैसला किया. अपेक्षाकृत एक कमजोर नेता से शिवराज ने खुद को लोकप्रिय नेता बनाया और भाजपा को लगातार 2008 और 2013 के विधानसभा चुनावों में जीत दिलाई.