नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में सियासी संकट जारी है. पॉलिटिकल ड्रामे के बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने कांग्रेस छोड़ दी है. वह अब बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. सिंधिया ने पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और अमित शाह (Amit Shah) से मुलाक़ात की. सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ी, इसके बाद कांग्रेस के 19 विधायकों ने विधायकी से ही इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफा देने वाले 19 विधायकों में 6 मंत्री भी हैं. ये सभी इस समय बेंगलुरु में एक रेसॉर्ट में रुके हुए हैं. सभी ने वहीं से ही इस्तीफा दिया है. माना रहा है कि ये सभी सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल होंगे. कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का कहना है कि अब शायद ही मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बच पाए. वहीं, दूसरी ओर विधायकों द्वारा इस्तीफे को लेकर कांग्रेस का कहना है कि पार्टी ने इस्तीफे दिलवाये हैं, ताकि मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा सके. Also Read - कांग्रेस ने सांसदों के वेतन में कटौती का स्वागत किया, सांसद निधि बहाल करने की मांग

मध्य प्रदेश में चल रहे सियासी घमासान के बीच कमलनाथ मंत्रिमंडल के पुनर्गठन की तैयारी जारी है. इस पर जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने भी मुहर लगा दी है. जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने राज्य सरकार के 20 मंत्रियों द्वारा मुख्यमंत्री कमलनाथ को इस्तीफा सौंपे जाने की बात का जिक्र करते हुए मंगलवार को कहा, “मंत्रिमंडल का पुनर्गठन हो, इसके लिए इस्तीफे दिए गए हैं. राज्य में कुल 34 मंत्री बनाए जा सकते हैं. वहीं 80 से ज्यादा निगम-मंडलों के अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारी बनने हैं. सभी को एडजस्ट कर लिया जाएगा.” Also Read - मध्य प्रदेश में बेकाबू रेत माफिया लॉकडाउन में भी कर रहे हैं खनन, ग्वालियर में सरकारी अमले पर किया हमला

पीसी शर्मा ने कहा, “कमलनाथ सरकार पर कोई संकट नहीं है. विपक्ष के 10 विधायक हमारे संपर्क में है, इसलिए कांग्रेस सरकार को समर्थन देने वाले विधायकों की संख्या 121 से बढ़कर 131 हो जाएगी.” ज्ञात हो कि सोमवार की देर रात कैबिनेट की अनौपचारिक बैठक हुई थी. राज्य सरकार के लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने सोमवार की रात मुख्यमंत्री आवास से बाहर निकलने के बाद संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक में मौजूद 20 मंत्रियों ने अपने इस्तीफे सौंप दिए हैं. हम भाजपा की घृणित चाल को पूरा नहीं होने देंगे.”

राज्य के 17 विधायक सोमवार की सुबह से लापता है और सभी के फोन बंद है. इसके बाद से सरकार पर संकट मंडराने लगा है. यह सभी विधायक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक हैं. इन विधायकों के फैसले पर ही सरकार का भविष्य टिका हुआ है. वहीं, दूसरी ओर सिंधिया ने मंगलवार को कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है, जिससे मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार पर संकट और भी बढ़ गया है. वर्तमान विधानसभा की स्थिति पर गौर करें तो पता चलता है राज्य में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत नहीं है. राज्य की 230 सीटों में से 228 विधायक हैं और दो सीटें खाली हैं. कांग्रेस के 114 और भाजपा के 107 विधायक हैं. कांग्रेस की कमलनाथ सरकार निर्दलीय चार, बसपा के दो और सपा के एक विधायक के समर्थन से चल रही है.