नई दिल्‍ली: तमिलनाडु (Tamil Nadu) की मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने सुपरस्‍टार रजनीकांत की समाज सुधारक ई वी रामासामी ‘पेरियार’ (E. V. Ramasamy Periyar) पर कथित टिप्‍पणी के मामले में दायर याचिका आज गुरुवार को खारिज कर दी है. एक द्रविड़ कार्यकर्ता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि ‘मैजिस्ट्रेट कोर्ट जाने के बजाय हाईकोर्ट क्यों जाएं?’

बता दें कि बीती 14 जनवरी को तमिल पत्रिका ‘तुगलक’ द्वारा यहां आयोजित एक कार्यक्रम में रजनीकांत ने आरोप लगाया था, ”1971 में पेरियार ने सलेम में एक रैली निकाली थी, जिसमें भगवान श्रीरामचंद्र और सीता की वस्त्रहीन तस्वीरों को जूतों की माला के साथ चित्रित किया गया था.”

बीते 21 जनवरी मंगलवार को सुपरस्टार रजनीकांत ने समाज सुधारक ई वी रामासामी ‘पेरियार’ द्वारा दशकों पहले निकाली गई एक रैली को लेकर की गई अपनी टिप्पणी पर माफी मांगने से इनकार कर दिया था. उन्होंने कहा कि वह न तो खेद प्रकट करेंगे और न ही माफी मांगेंगे तथा उनकी टिप्पणी तथ्यात्मक थी.

अभिनेता ने अपने बयान के समर्थन में पत्रिकाओं और अखबारों की क्लिपिंग पेश की कि 1971 में सेलम में पेरियार के नेतृत्व में निकाली गई एक रैली में भगवान राम और सीता की वस्त्रहीन मूर्तियां रखी गई थीं, जिन पर जूतों की माला थी.

द्रविड़ संगठन द्रविदार विधुतलाई कझगम (डीवीके) ने आरोप लगाया था कि अभिनेता सरासर झूठ बोल रहे हैं. संगठन ने रजनीकांत से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की और उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी. इससे संबंधित एक घटनाक्रम में डीवीके ने बीते मंगलवार को मद्रास हाईकोर्ट का का रुख किया और अभिनेता के खिलाफ मामला दर्ज करने का पुलिस को निर्देश दिये जाने का अनुरोध किया.

डीवीके के सचिव उमापति ने अपनी याचिका में कहा था कि उन्होंने 18 जनवरी को पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई.