Maha Shivratri 2020: आज देवों के देव महादेव की पूजा करने का महापर्व महाशिवरात्रि है. पुराणों के अनुसार आज ही के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इसलिए इस दिन को शिवरात्रि के बजाय महाशिवरात्रि के रूप में पूजा जाता है. शिव जी का दिन हो और उनके भक्त उनके द्वार ना पहुंचे यह असंभव है. महाशिवरात्री के पवित्र त्योहार पर देश भर से मंदिरों व शिवधामों पर पहुंच रहें भक्तों की उर्जा देखने लायक है. उज्जैन का महाकाल मंदिर हो या भी वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर. हर जगह भगवान शिव के भक्त सुबह-सुबह पहुंच कर उन्हें दूध और जल से नहला रहे हैं और अपनी भक्ति को भगवान शिव के लिए समर्पित कर रहे हैं. पूरे देश में शिव के भक्तों का सैलाब देखने को मिल रहा है. Also Read - Varanasi Covid Guidelines: वाराणसी में भी कोरोना का कहर, गंगा घाट पर जाने का समय तय; DM ने दिये आदेश

बता दें उज्जैन को महाकाल और काशी को महादेव की नगरी के नाम से भी पुकारा जाता है. ऐसे में काशी में महादेव के भक्त आधी रात से ही लाइन में लगे हुए हैं. गंगाघाट से लेकर भोलेनाथ के दरबार तक लोगों की लंबी लाइने लगी हुई हैं. लोग आधी रात से ही मंदिर के दरवाजों के खुलने का इंतजार कर रहे थें.

हिंदू धर्म में शिवलिंग भगवान शिव का प्रतीक हैं. भगवान शिव अनंत काल के प्रतीक हैं. मान्यताओं के अनुसार, लिंग एक विशाल लौकिक अंडाशय है, जिसका अर्थ है ब्रह्माण्ड. इसे ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है. शिव किसी भगवान का रूप नहीं लेकिन एक योगी का रूप हैं. साधुओं की मानें तो वह उपर नहीं रहते वह हर कण कण में विलिन हैं.

इस बार शिवरात्री नहीं बल्कि लोग महाशिवरात्री मना रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि हिंदू धर्म में हर माह शिवरात्रि आती है पर फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के रूप में पूजा जाता है. इसी दिन शिव-पार्वती (Shiv Parvati Marriage) का विवाह हुआ था. इसलिए दोनों का साथ में पूजन किया जाता है.

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