नई दिल्ली: राफेल सौदे पर बुधवार को संसद में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि ‘महाझूठबंधन’ का झूठ बेनकाब हो गया और सत्य की जीत हुई. संसद में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, राजग सरकार के तहत हुआ राफेल सौदा पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के दौरान इस सौदे पर हुई वार्ता पेशकश की तुलना में 2.86 प्रतिशत सस्ता है. जेटली ने ट्वीट किया, ‘सत्यमेव जयते.. सत्य की हमेशा जीत होती है. राफेल मुद्दे पर कैग की रिपोर्ट ने इसकी पुष्टि की है.’ उन्होंने कहा कि 2016 बनाम 2007… कम कीमत, त्वरित आपूर्ति, बेहतर रखरखाव, महंगाई के आधार पर कम वृद्धि.

कांग्रेस पर साधा निशाना
कांग्रेस सहित विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘यह नहीं कहा जा सकता है कि उच्चतम न्यायालय गलत है, कैग गलत है और केवल ‘परिवार’ सही है. जेटली का यह बयान ऐसे समय में आया है जब आज कैग की राफेल मुद्दे पर रिपोर्ट संसद में पेश की गई है. इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित विभिन्न विपक्षी दल सरकार पर निशाना साधते रहे हैं. कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दल राफेल सौदे में कथित घोटाले का आरोप लगाते हुए इसकी संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग करते रहे हैं . संसद सत्र के दौरान भी यह मुद्दा दोनों सदनों में छाया रहा और कार्यवाही बाधित हुई. अरुण जेटली ने कहा, ‘जो लोग लगातार झूठ बोलते हों, उन्हें लोकतंत्र कैसे दंडित करे. उन्होंने कहा,‘महाझूठबंधन’ का झूठ बेनकाब हो गया.

कांग्रेस सांसद ने उठाए सवाल
दूसरी ओर रक्षा संबंधी संसद की परामर्श समिति के सदस्य और कांग्रेस सांसद प्रदीप भट्टाचार्य ने लड़ाकू विमान राफेल की खरीद के मामले में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट को अधूरी बताते हुये कहा है कि इसे अभी दुरुस्त किये जाने की जरूरत है. कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य भट्टाचार्य ने बुधवार को संसद में कैग की रिपोर्ट पेश होने के बाद कहा ‘रिपोर्ट को एक नजर देखने के बाद फौरी तौर पर ऐसा लगता है कि सौदे का सही आंकलन हुआ ही नहीं है. सही आंकलन क्यों नहीं हुआ…., मुझे लगता है कि कुछ तथ्यों को छुपाने के लिये कोई बंदोबस्त हुआ है.

तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया
उन्होंने सरकार पर तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाते हुए कहा ‘या तो रक्षा मंत्रालय द्वारा पूरे दस्तावेज कैग के पास नहीं पहुंचाए गये या दस्तावेज पूरे पहुंचने के बाद भी तथ्यों को क्यों छुपाया गया, यह हमारी समझ से परे है. ऐसे में मुझे लगता है कि इस रिपोर्ट को थोड़ा दुरुस्त करना जरूरी है. भट्टाचार्य ने कहा कि अभी उन्हें पूरी रिपोर्ट देखने का मौका नहीं मिला है, लेकिन फौरी तौर पर इसे देखने से साफ लगता है कि राफेल सौदे को लेकर इसमें पूरे तथ्य समाहित नहीं हो पाए हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि इसमें लड़ाकू विमान की कीमत का उपयुक्त जिक्र नहीं है.