
Tanuja Joshi
हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक... तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी ... और पढ़ें
महाराष्ट्र सरकार ने मिलावटी और नकली डेयरी उत्पादों पर लगाम कसने के लिए बड़ा कदम उठाया है. राज्य में अब नॉन-डेयरी या एनालॉग पनीर के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है. सरकार का कहना है कि ये फैसला उपभोक्ताओं को असली और नकली पनीर के बीच भ्रम से बचाने और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के मकसद से लिया गया है.
खाद्य सुरक्षा आयुक्त की तरफ से जारी आदेश के अनुसार अब राज्य में किसी भी लेवल पर एनालॉग पनीर का उत्पादन, पैकिंग, स्टोरेज, थोक या खुदरा बिक्री और वितरण नहीं किया जा सकेगा. अगर कोई व्यक्ति या कारोबारी इस नियम का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई होगी. दोषी पाए जाने पर छह महीने तक की जेल और एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
अगर असुरक्षित खाद्य पदार्थ के सेवन से किसी व्यक्ति की मौत होती है तो कानून के तहत उम्रकैद और कम से कम 10 लाख रुपये के जुर्माने का भी प्रावधान है. एनालॉग पनीर ऐसा प्रोडक्ट होता है जिसे दूध की जगह वनस्पति तेल, वेजिटेबल फैट और अन्य गैर-डेयरी सामग्री से तैयार किया जाता है. देखने में ये सामान्य पनीर जैसा लगता है, लेकिन इसकी संरचना और पोषण मूल्य अलग हो सकते हैं. अधिकारियों का कहना है कि जब ऐसे उत्पाद को बिना स्पष्ट जानकारी दिए असली पनीर बताकर बेचा जाता है, तो यह उपभोक्ताओं के साथ धोखा और अनुचित व्यापारिक गतिविधि मानी जाती है.
पिछले कुछ महीनों से महाराष्ट्र में नकली दूध और पनीर के खिलाफ स्पेशल अभियान चलाया जा रहा है. इस दौरान कई स्थानों पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में कथित तौर पर मिलावटी पनीर और उससे जुड़े कच्चे माल को जब्त किया गया. जांच में ऐसे कई मामले सामने आए, जहां सस्ते विकल्पों का इस्तेमाल कर पनीर जैसा उत्पाद तैयार किया जा रहा था और उसे असली डेयरी पनीर के नाम पर बाजार में बेचा जा रहा था.
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