मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. फडणवीस ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात कर उन्हें अपने इस्तीफे का पत्र सौंपा. बता दें कि महाराष्ट्र की वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल नौ नवंबर को समाप्त हो रहा है. इस्तीफा देने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उन्होंने पांच साल तक महाराष्ट्र की सेवा की. उन्होंने कहा, “मैंने 5 साल तक पारदर्शिता की सरकार चलाने की कोशिश की.” साथ ही उन्होंने कहा कि इस बार के चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी.

फड़णवीस ने यहां कहा, ‘‘राज्यपाल ने मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. मैं महाराष्ट्र के लोगों का पांच सालों तक सेवा का मौका देने के लिए धन्यवाद करता हूं.’’ शिवसेना के दावों को खारिज करते हुए फड़णवीस ने जोर देकर कहा कि ‘‘मेरी मौजूदगी में’’ दोनों दलों द्वारा मुख्यमंत्री पद की साझेदारी को लेकर कोई समझौता नहीं किया गया है. शिवसेना ने दावा किया था कि लोकसभा चुनावों से पहले दोनों गठबंधन सहयोगियों ने अगले कार्यकाल में ढाई-ढाई साल के लिये मुख्यमंत्री पद की साझेदारी का फैसला किया था. फड़णवीस ने दावा किया कि उन्होंने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से गतिरोध तोड़ने के लिये फोन पर बात करने की कोशिश की लेकिन, ‘‘उद्धव जी ने मेरा फोन नहीं उठाया.’’

उन्होंने कहा कि भाजपा से किनारा करने और विपक्षी कांग्रेस व राकांपा से बात करने की ‘‘नीति’’ गलत थी. फड़णवीस दक्षिण मुंबई स्थित राजभवन पहुंचे और राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को अपना इस्तीफा सौंपा. फड़णवीस ने कहा कि राज्यपाल ने उनसे अगली व्यवस्था होने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने को कहा है.

देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “मैं फिर से यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह कभी भी तय नहीं किया गया था कि ढाई-ढाई साल तक सीएम पद साझा किया जाएगा. इस मुद्दे पर कभी फैसला नहीं हुआ. यहां तक कि अमित शाह जी और नितिन गडकरी जी ने भी यह कभी नहीं कहा था.” फडणवीस ने आगे कहा, “दुर्भाग्य से, जब परिणाम आए, उद्धव जी ने कहा कि सरकार गठन के लिए सभी विकल्प खुले हैं. यह हमारे लिए चौंकाने वाला था क्योंकि लोगों ने गठबंधन के लिए जनादेश दिया था और ऐसी परिस्थितियों में यह हमारे लिए एक बड़ा सवाल था कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा कि सभी विकल्प हैं खुले हैं.”

देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “हम सभी बाला साहेब ठाकरे का सम्मान करते हैं, वास्तव में हमने कभी भी उद्धव जी ठाकरे के खिलाफ कुछ नहीं कहा, लेकिन पिछले 5 वर्षों में और विशेष रूप से पिछले 10 दिनों में मोदी जी सहित हमारे शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ जिस तरह के बयान दिए गए, वे सहनीय नहीं थे.”


बता दें कि महाराष्ट्र में 24 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के एक पखवाड़े बाद भी सरकार गठन पर कोई सहमति नहीं बनी है. भाजपा और शिवसेना के बीच मुख्यमंत्री के पद को लेकर रस्साकशी के कारण उनके पास संयुक्त रूप से 161 विधायकों के साथ बहुमत से अधिक का आंकड़ा होने के बावजूद सरकार गठन पर गतिरोध बना हुआ है. महाराष्ट्र में 288 सदस्यीय सदन में बहुमत का आंकड़ा 145 है. विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 105 सीट, शिवसेना ने 56, राकांपा ने 54 और कांग्रेस ने 44 सीट जीती है.