मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने 19वीं सदी के समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ देने के लिए केंद्र से सिफारिश की है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने मंगलवार बताया कि उनकी सरकार ने केंद्र सरकार से महात्मा ज्योतिबा फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ देने की सिफारिश की है. Also Read - Covid-19 Vaccine Latest News: PM मोदी 28 नवंबर को पुणे से दे सकते हैं कोरोना वैक्‍सीन को लेकर अच्‍छी खबर

राष्ट्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग जाति (ओबीसी) महासंघ के सम्मेलन में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने फुले दंपति के निधन के एक सदी के बाद उन्हें मरणोपरांत यह सम्मान देने के लिए केंद्र से सिफारिश करने की जानकारी दी. Also Read - Ideal House Rent Act: केंद्र सरकार जल्द लाएगी आदर्श किराया कानून, जानिए- क्या इससे रुकेगा नई झोपड़पट्टियां बांधने का काम

संयोग से, फड़णवीस ने ऐसा ही एक बयान दो साल पहले दिया था कि उन्होंने केंद्र से महात्मा फूले की 125वीं पुण्यतिथि पर उन्हें यह सम्मान देने की सिफारिश की है. ज्योतिराव गोविंदाराव फुले (महात्मा फुले) का जन्म 11 अप्रैल, 1827 और उनकी पत्नी सावित्रीबाई के. पाटिल का जन्म तीन जनवरी, 1831 को सतारा के अलग-अलग गावों में हुआ था.

बाद में 13 वर्षीय ज्योतिराव का विवाह एक सम्पन्न किसान की नौ वर्षीय बेटी सावित्रीबाई के साथ हो गया था. दोनों पिछड़ी जाति से थे, महात्मा फुले विचारक, समाज सुधारक, जाति-विरोधी कार्यकर्ता और लेखक थे, वहीं उनकी पत्नी उनकी अनुगामी होने के अतिरिक्त शिक्षाविद तथा कवयित्री थीं. उन्होंने दहेज प्रथा के खिलाफ की आवाज उठाई थी.

पति-पत्नी ने जाति प्रथा, छुआछूत और हिंदू पारिवारिक जीवन में सुधार के लिए लड़ाई लड़ी तथा बाद में पिछड़े और शोषित लोगों को समान अधिकार दिलाने के लिए 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की थी.

(इनपुट: एजेंसी)