मुंबई: महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर आज का दिन बेहद अहम है. आज सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र में तत्काल फ्लोर टेस्ट की मांग करने वाली शिवसेना-कांग्रेस-NCP पार्टी गठबंधन द्वारा दायर संयुक्त याचिका पर फिर से सुनवाई करेगा. इसके अलावा विपक्षी पार्टियां अपने-अपने विधायकों को महाराष्ट्र पर फैसला आने तक ‘संभालने’ की कोशिश में लगी हैं. कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और शिवसेना अपने-अपने विधायकों को होटलों में ठहराने की व्यवस्था की है, ताकि भाजपा और राकांपा का बागी गुट उनकी एकता में सेंध न लगा पाएं. शिवसेना ने अपने विधयकों को होटल ललित में, कांग्रेस ने जेडबल्यू मैरिअट में और राकांपा ने रिनेसां में ठहराया है. शिवसेना नेता सुभाष देसाई शिवसैनिक विधायकों से संपर्क बनाए हुए हैं. होटल की घेराबंदी की गई है और वहां से किसी विधायक को बाहर जाने की अनुमति नहीं है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के निर्देश पर विधायकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी मिलिंद नार्वेकर संभाल रहे हैं.

उद्धव के उत्तराधिकारी आदित्य ठाकरे भी विधायकों से मिलकर उनका मनोबल बढ़ाने में जुटे हैं. राकांपा में विधायकों को संभालने की जिम्मेदारी जितेंद्र अहवद संभाल रहे हैं. वह खासतौर से गणेश नाइक पर नजर रख रहे हैं, जिन्होंने चुनाव से पहले भाजपा से संपर्क साधने की कोशिश की थी. पार्टी प्रमुख शरद पवार स्वयं अपने विधायकों से मिल रहे हैं, जबकि मुंबई इकाई के प्रमुख नवाब मलिक और विधायक दल के नेता जयंत पाटिल होटल रिनेसां का लगातार चक्कर लगा रहे हैं.

वहीं, कांग्रेस अपने विधायकों की निगरानी के लिए दिल्ली से आए नेताओं पर निर्भर है. पार्टी ने शुरुआत में अपने विधायकों को मुंबई से बाहर किसी होटल में ठहराने की योजना बनाई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने की उम्मीद व शरद पवार की सलाह पर पार्टी ने अपने विधायकों को मुंबई में ही ठहराने का निर्णय लिया. कांग्रेस के विधायक खासतौर से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और पृथ्वीराज चव्हाण की निगरानी में हैं. इन दोनों की अनुमति के बिना कोई कांग्रेस विधायकों से नहीं मिल सकता. कांग्रेस विधायकों को संभाले रखने का पूरा प्रबंध पार्टी के संकट मोचन माने जाने वाले अहमद पटेल संभाले हुए हैं. वह यहीं से कानूनी मामले देख रही दिल्ली टीम को भी निर्देश दे रहे हैं.

बता दें कि महाराष्ट्र में सरकार गठन का मामला उच्चतम न्यायालय की न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ गया है जिसने केंद्र सरकार से कहा है कि वह आज (सोमवार) राज्यपाल का पत्र अदालत को सौंपे जिसमें देवेन्द्र फडणवीस को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया है. साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि वह भाजपा नेता द्वारा राज्य में सरकार बनाने के लिए किए गए दावे का पत्र भी अदालत के समक्ष सोमवार को सुबह साढ़े दस बजे सुनवाई के दौरान पेश करे.

महाराष्ट्र का सियासी ड्रामा रविवार की सुबह उच्चतम न्यायालय पहुंचा. इससे एक दिन पहले फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली जबकि शिवसेना ने दावा किया कि शिवसेना-राकांपा- कांग्रेस गठबंधन के पास 165 विधायकों का समर्थन है और वह आसानी से विधानसभा में बहुमत साबित कर देगा. भाजपा ने दावा किया है कि फडणवीस के पास 170 विधायकों का समर्थन है. 288 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए 145 विधायकों की जरूरत है.

उच्चतम न्यायालय में रविवार को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति एन वी रमन, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस गठबंधन को कोई अंतरिम राहत नहीं दी और फडणवीस सरकार को 24 घंटे के अंदर बहुमत साबित करने का कोई निर्देश जारी नहीं किया. अदालत ने कहा कि इस सोमवार को दोनों पत्रों को पढ़ने के बाद ही इस मुद्दे पर विचार करेगी. भाजपा नेता आशीष शेलार के मुताबिक राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने नयी सरकार को सदन में बहुमत साबित करने के लिए 30 नवम्बर तक का समय दिया है.

(इनपुट ऐजेंसीज)