नई दिल्ली. साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार ने एशिया के सबसे बड़े ‘स्लम क्षेत्र’ धारवी का चेहरा बदलने का निर्णय लिया है. इसके लिए मंगलवार को बकायदा मसौदा भी पास हो गया है. इस प्लान के अंतर्गत झोपड़ियों में रहने वाले 60 हजार लोगों को योजनाबद्ध तरीके से आवासों में स्थापित कराया जाएगा. Also Read - Lockdown 5.0: महाराष्ट्र सरकार ने लॉकडाउन 30 जून तक बढ़ाया, पूरे राज्य में बंद रहेंगे धार्मिक स्थल, शॉपिंग मॉल

नए प्लान के तहत अनुमान लगाया गया है कि 5 करोड़ स्क्वायर फीट में एक ब्रिक्रीयुक्त बिल्डिंग का निर्माण उसके ठीक बगल के जिले बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में कराया जाए. बता दें कि ये इलाका ऐसा है जहां रियल इस्टेट का दाम पूरे भारत में सबसे ज्यादा है. Also Read - Good News: बॉलीवुड में लौट आई बहार, फिर से शुरु होगी फिल्मों की शूटिंग

साल 2004 से चुनावी एजेंडा
धारवी के उद्धार के लिए सबसे पहले साल 2004 में प्रयास किया गया. इसके बाद से हर चुनाव में ये राजनैतिक एजेंडा का केंद्र रहा है. लेकिन फिर भी इसका विकास नहीं हुआ. इसे लेकर साल 2007-11 और 2016 में ग्लोबल लेवल के प्रयास भी इन्हें प्राइवेट बिल्डिंग की तरफ निकालने में असफल रहीं हैं. इस स्लम कॉलोन के पुनरुद्धार के लिए निर्णायक प्रयास के तौर पर सरकार ने प्रोजेक्ट के टेक्निकल और फाइनेंशियल मॉडल में बड़ा परिवर्तन किया है. Also Read - सत्ता के लालची लोग महाराष्ट्र सरकार को अस्थिर करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं : कांग्रेस

पहले ये था प्लान
पहले ये प्रयास किया जा रहा था कि 240 हेक्टेयर एरिया को 5 विकासशील सेक्टर में बांटा जाए और उन्हें स्वतंत्र रूप से विकसित किया जाए. सरकार ने अब इन्हें एक में ही कंबाइन किया है. ऐसे में पूरा स्लम एरिया एक सिंगल एंटिटी के रूप में विकसीत होगा, जिससे उन्हें कॉमर्शियल रूप से फायदा पहुंचेगा.

एक ही सेक्टर में मिलाया गया
बता दें कि ऐसे समय में जब प्राइवेट बिल्डर इसे दोबारा से डवलप करने के लिए आगे नहीं आ रहे थे तो कांग्रेस-एनसीपी की सरकार ने इसके एक सेक्टर 62.5 हेक्टेयर एरिया के विकास का जिम्मा महाराष्ट्रा हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MAADA) को सौंप दिया था. लेकिन मंगलवार को इसे भी एक ही सेक्टर में मिला दिया गया है.