नई दिल्ली:2 अक्टूबर को हर साल उस महात्मा के नाम समर्पित किया जाता है जिन्होंने देश को हमेशा अहिंसा के रास्ते पर चलने की शिक्षा दी है. 2 अक्टूबर 1869 राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म हुआ था. साल 1948 में उनकी मत्यु के बाद से ही हर साल 2 अक्तूबर को गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है. महात्मा गांधी ने पूरी दुनिया को यह सीख दी है कि बिना किसी हिंसा के कोई भी लड़ाई लड़ी जा सकती है. महात्मा गांधी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे. महात्मा गांधी हमेशा यह कहते थे कि अगर कोई एक थप्पड़ मारे तो उसे दूसरा गाल दे देना चाहिए. क्योंकि आपकी विनम्रता से सामने वाला इंसान जरूर एक न एक दिन पिघल ही जाएगा. गांधी जयंती के मौके पर आज हम आपको बताते हैं  उनके द्वारा चलाए गए कुछ महत्वपूर्ण आंदोलन के बारे में.

1.चंपारण और खेड़ा सत्याग्रह:

भारत में गांधी जी के नेतृत्व में सत्याग्रह आंदोलन के अंर्तगत अनेक कार्यक्रम चलाए गये थे. जिनमें प्रमुख है, चंपारण सत्याग्रह, बारदोली सत्याग्रह और खेड़ा सत्याग्रह. ये सभी आन्दोलन भारत की आजादी के प्रति महात्मा गांधी के योगदान को परिलक्षित करते हैं. गांधी जी ने कहा था कि, ये एक ऐसा आंदोलन है जो पूरी तरह सच्चाई पर कायम है और हिंसा का इसमें कोई स्थान नहीं है.

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15 अप्रैल,1917 को राजकुमार शुक्ल जैसे एक अनाम-से आदमी के साथ मोहनदास करमचंद गांधी नाम का आदमी चंपारण, मोतिहारी पहुंचा था. बाबू गोरख प्रसाद के घर पर उन्हें ठहराया गया. बिहार के उत्तर-पश्चिम में स्थित चंपारण वह इलाका है जहां सत्याग्रह की नींव पड़ी. नील की खेती के नाम पर अंग्रेजी शासन द्वारा किसानों के शोषण के खिलाफ यहां गांधी के नेतृत्व में 1917 में सत्याग्रह आंदोलन चला था. बिहार में चंपारण जिले को ये सौभाग्य प्राप्त है कि दक्षिण अफ्रिका से वापस आकर महात्मा गांधी ने सत्याग्रह आन्दोलन का प्रारम्भ यहीं से किया. चंपारण सत्याग्रह में गाँधी जी को सफलता भी प्राप्त हुई.

खेड़ा सत्याग्रह

खेड़ा सत्याग्रह गुजरात के खेड़ा जिले में किसानों का अंग्रेज सरकार की कर-वसूली के विरुद्ध एक सत्याग्रह (आन्दोलन) था. यह महात्मा गांधी की प्रेरणा से वल्लभ भाई पटेल एवं अन्य नेताओं की अगुवाई में हुआ था. इस सत्याग्रह के फलस्वरूप गुजरात के जनजीवन में एक नया तेज और उत्साह उत्पन्न हुआ और आत्मविश्वास जागा. यह सत्याग्रह यद्यपि साधारण सा था तथापि भारतीय चेतना के इतिहास में इसका महत्व चंपारन के सत्याग्रह से कम नहीं है.

2. संविनय अवज्ञा आंदोलन

इस आंदोलन के बारे में बात की जाए तो यह उन आंदोलन में से एक था जो ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ चलाया गया था. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा इस आंदोलन को चलाया गया था. 1929ई. तक भारत को ब्रिटेन के इरादों का पता लगने लग गया था जिसके बाद भारत को यह शक था कि वह औपनिवेशिक स्वराज्य प्रदान करने की अपनी घोषणा पर अमल करेगा या नहीं करेगा. इसको लेकर घोषणा कर दी गई थी कि लाहौर अधिवेशन में उसका लक्ष्य भारत के लिए पूर्ण स्वाधीनता प्राप्त करना था. इस आंदोलन के तहत नमक कानून का उल्लंघन कर खुद ही नमक बनाया गया.

3.भारत छोड़ो आंदोलन

भारत छोड़ो आंदोलन 9 अगस्त, 1942 ई. को संपूर्ण भारत में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आह्वान पर प्रारम्भ हुआ था. भारत की आजादी से सम्बन्धित इतिहास में दो पड़ाव सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण नजर आते हैं- प्रथम ‘1857 ई. का स्वतंत्रता संग्राम’ और द्वितीय ‘1942 ई. का भारत छोड़ो आन्दोलन’. भारत को जल्द ही आज़ादी दिलाने के लिए महात्मा गांधी द्वारा अंग्रेज शासन के विरुद्ध यह एक बड़ा ‘नागरिक अवज्ञा आन्दोलन’ था. ‘क्रिप्स मिशन’ की असफलता के बाद गांधी जी ने एक और बड़ा आन्दोलन प्रारम्भ करने का निश्चय ले लिया. इस आंदोलन को ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ का नाम दिया गया.

4. दांडी मार्च
दांडी मार्च से अभिप्राय उस पैदल यात्रा से है, जो महात्मा गांधी और उनके स्वयं सेवकों द्वारा 12 मार्च, 1930 ई. को प्रारम्भ की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य था- अंग्रेजों द्वारा बनाये गए ‘नमक कानून को तोड़ना. गांधी जी ने अपने 78 स्वयं सेवकों, जिनमें वेब मिलर भी एक था, के साथ साबरमती आश्रम से 358 कि.मी. दूर स्थित दांडी के लिए प्रस्थान किया. लगभग 24 दिन बाद 6 अप्रैल, 1930 ई. को दांडी पहुंचकर उन्होंने समुद्रतट पर नमक कानून को तोड़ा. महात्मा गांधी ने दांडी यात्रा के दौरान सूरत, डिंडौरी, वांज, धमन के बाद नवसारी को यात्रा के आखिरी दिनों में अपना पड़ाव बनाया था. यहां से कराडी और दांडी की यात्रा पूरी की थी. नवसारी से दांडी का फासला लभभग 13 मील का है.

5. खिलाफत आंदोलन

खिलाफत आंदोलन (1919-1924) भारत में मुख्यत: मुसलमानों द्वारा चलाया गया राजनीतिक-धार्मिक आंदोलन था. इस आंदोलन का उद्देश्य तुर्की में खलीफा के पद की पुन:स्थापना कराने के लिये अंग्रेजों पर दबाव बनाना था.