बीते 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पांच सौ और हज़ार के नोटों पर लगाए गए अचानक प्रतीबंध के देश में खलबली मच गई। लोग अब भी बैंको और एटीएम के बाहर कैश के लिये लाइन लगाए हुए। Also Read - WB Election 2021: ब्रिगेड परेड ग्राउंड में PM Modi की मेगा रैली आज, Mithun Chakraborty भी होंगे शामिल

Also Read - PM Modi in Kevadia LIVE: पीएम मोदी गुजरात पहुंचे, केवड़िया में थोड़ी देर में सैन्‍य कमांडरों के सम्मेलन को करेंगे संबोधित

विरोधियों का कहना था कि इसका कुछ खास असर नहीं होगा। लेकिन पीएम मोदी के इस विज़न के बारे में किसी ने नहीं सोचा होगा कि वे एक तीर से कई निशाने लगाने वाले हैं। यह भी पढ़ें: PM मोदी ने आदित्य बिरला ग्रुप से ली 25 करोड़ रुपयों की रिश्वत: CM अरविंद केजरीवाल Also Read - BARC Report: साल 2020 में PM Modi का टेलीविजन पर रहा जलवा, दूरदर्शन ने भी किया राज, जानिए टॉप ट्रेंड

फाइल फोटो

फाइल फोटो

नोटबंदी के फायदे अब धीरे-धीरे दिखने लगे हैं। नोटबंदी से नक्सलियों की नीव चरमरा गई है। कैश की किल्लत के चलते उनके रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं।

इतना ही नहीं नक्सल प्रभावित राज्यों में पैसे की कमी और सुरक्षा बलों की ओर से बढ़ रहे दबाव के चलते पिछले 28 दिनों में 564 नक्सलियों और उनके समर्थकों ने सरेंडर किया है। यह भी पढ़ें: छत्तीसगढ़ में हुए नक्सली हमले में चार नक्सली हुए ढेर, एक जवान घायल

एक माह में नक्सलियों द्वारा किए गए सरेंडर की यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। ओडिशा, आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे नक्सल प्रभावित राज्यों में नोटबंदी का व्यापक असर साफ दिखाई दे रहा है।

फाइल फोटो

फाइल फोटो

खास बातें:

आकड़ों पर गौर करें तो नवंबर माह में हुए कुल 564 सरेंडर में से 469 सरेंडर 8 नवंबर के बाद हुए

नोटबंदी के चलते नक्सली राशन, कपड़ें और गोला बारूद खरीदने में काफी असमर्थ

इस संबंध में सुरक्षा एजेंसियों को हाई एलर्ट जारी किया गया

जानकारी के मुताबिक मलकानगिरी के जंगलों से अकेले 70 फीसदी नक्सलियों ने सरेंडर किये

कैश की किल्लत से बुनियादी सुविधाओं में दिक्कत

गोली-दवाई और इलाज के लिये भी पर्याप्त पैसे नहीं बचे

बीते 28 दिनों में कुल 564 नक्सलियों और उनके समर्थकों ने सरेंडर किया

फाइल फोटो

फाइल फोटो