नई दिल्ली: उस घटना के बाद हमारी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई. हमने उसे स्कूल भेजना बंद कर दिया. मेरी बेटी अपने मामा के यहां रह रही है. वह कभी भी घर नहीं आती. यहां तक कि ईद पर भी वह घर नहीं आई. हम किसी तरह का तमाशा नहीं चाहते. अपने निर्माणाधीन घर की दहलीज पर बैठे ये उस शख्स के शब्द थे, जिनकी बेटी को श्रीनगर के होटल में मेजर नितिन लीतुल गोगोई के साथ देखा गया था. मेजर को दोषी करार दिए जाने के कोर्ट के फैसले से अनजान 20 वर्षीय युवती के पिता मीडिया की ओर से अपनी बेटी को लेकर पूछे जा रहे सवालों के जवाब देने की कोशिश कर रहे थे.

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यह महज संयोग ही था कि मेजर गोगोई के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का फैसला उस दिन आया जिस दिन परिवार ने 2014 में बाढ़ से तबाह हो गए अपने घर का निर्माण फिर से शुरू किया. 2014 के बाढ़ में घर की तबाही के बाद 6 लोगों का परिवार टीन के छप्पर वाले एक घर में रह रहा है. युवती की मां ने बताया कि घर को फिर से बनाने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे.

हालांकि सरकार की ओर से मुआवजा मिला था, लेकिन वह पर्याप्त नहीं था. हमने अपनी जमीन का एक टुकड़ा बेच दिया और फिर से अपने घर का निर्माण कार्य शुरू कराया. पिछले तीन महीने से युवती का परिवार गुमनामी की जिंदगी जी रहा है. युवती के पिता ने बताया कि एक पिता होने के नाते अपनी बेटी के लिए मेरे दिल में बहुत जगह और प्यार है, लेकिन मेरे साले बहुत सख्त हैं और मेरी बेटी उनके साथ रह रही है.

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युवती का परिवार बहुत ही गरीब है. पिता मजदूरी करके घर का खर्च चलाते हैं, वहीं युवती पढ़ाई के साथ-साथ हस्तकला का काम करती थी. अत्यंत गरीबी में जी रहा परिवार जिंदगी सुधारने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है. पैसे कमाने के लिए युवती भी सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ गई थी. लड़की ने मजिस्ट्रेट के सामने जो बयान दिया था उसके अनुसार लड़की अपनी मर्जी से मेजर गोगोई और उनके सहयोगी समीर मल्ला के साथ गई थी.

कोर्ट ऑफ इनक्वायरी ने गोगोई को दो आरोपों में आरोपित किया है. उन पर श्रीनगर के एक होटल में एक स्थानीय लड़की के साथ कथित तौर पर पाए जाने और अपनी ड्यूटी के स्थान से दूर रहने के आरोप हैं. इन आरोपों ने गोगोई के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त किया.

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वहीं मध्य कश्मीर में पिछले साल एक जीप की बोनट से बांध कर मानव कवच के रूप में इस्तेमाल किए गए दस्तकार फारूक अहमद डार ने मेजर लीतुल गोगोई को एक मामले में थल सेना की एक कोर्ट ऑफ इनक्वायरी में अभ्यारोपित किए जाने की खबर सुनने पर कहा कि आखिरकार न्याय हुआ. डार ने कहा, ‘मैं अल्लाह का शुक्रगुजार हूं. जिस व्यक्ति ने मेरा जीवन बर्बाद कर दिया, उसे आखिरकार ईश्वर की नाराजगी का सामना करना पड़ा.