पेरिस: पूरी दुनिया इस वक़्त कोरोना वायरस की चपेट में हैं. दुनिया के 183 देशों में दिसंबर से अब तक (रविवार) कोविड-19 महामारी के संक्रमण के 5,39,360 मामले दर्ज किए गए थे. हर देश ने इस महामारी के खिलाफ जंग छेड़ दी है मगर कोई पूरी तरह सफल नहीं हो पा रहा है. Also Read - दिल्ली में 22000 के पार पहुंचे कोरोना वायरस के मामले, अब तक 556 की मौत

ऐसे में कोरोना वायरस को मात देने के लिए मलेरिया-रोधी दवा क्लोरोक्विन के इस्तेमाल की बात करने वाले विवादास्पद फ्रांसीसी प्रोफेसर डिडिएर राउल्ट ने दावा किया है कि उन्होंने जो नया अध्ययन किया है, वह वायरस को खत्म करने में इस दवा के ‘‘कारगर होने’’ की पुष्टि करता है. Also Read - अगस्त-सितंबर में टीम इंडिया का कैंप लगाने के बारे में सोच रही है बीसीसीआई

लेकिन कई अन्य वैज्ञानिकों और आलोचकों ने मार्सिले में ला टिमोन अस्पताल के संक्रामक रोग विभाग के प्रमुख व सूक्ष्मजीव विज्ञानी डिडिएर राउल्ट के शोध पर संदेह जताया है. उन्होंने कहा कि परीक्षण उचित तरीके से नहीं किया गया. Also Read - अमेरिका के बायोटेक कंपनी का दावा, कोरोना के मरीजों पर असरदार हो रहा है यह दवा

डॉ. राउल्ट, जिनके सिद्धांत को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनाया है, ने कहा कि 80 रोगियों को लेकर किए गए उनके नए अध्ययन से पता चला है कि इस दवा के जरिए इलाज से पांच में से चार मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ.