नई दिल्ली: 29 सितंबर 2008 को हुए मालेगांव धमाके की आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की आज एनआईए की विशेष कोर्ट में पेशी हुई. इस दौरान उनसे जितने भी सवाल पूछे गए उन सभी के जवाब में उन्होंने ‘मुझे कुछ नहीं पता’ कहा. कोर्ट ने उनसे पूछा कि मालेगांव ब्लास्ट में कितने लोग मारे गए थे, कितने घायल हुए थे, इस पर उन्होंने जवाब दिया कि मुझे नहीं पता.

शहीद हेमंत करकरे को मालेगांव ब्लास्ट में मिला था यह ‘ठोस सबूत’, इसलिए पकड़ी गई थी प्रज्ञा ठाकुर

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर अब भोपाल से भाजपा की सांसद हैं. लोकसभा चुनाव 2019 में उन्होंने दिग्विजय सिंह को हराकर जीत दर्ज की थी. चुनाव के दौरान शहीद हेमंत करकरे को लेकर विवादित बयान दिए जाने के साथ ही उनके कई बयान विवादों में रहे. इसके बाद भी उन्होंने इन सब को पीछे छोड़ते हुए जीत दर्ज की. सांसद बनने के बाद ये पहला मौका था जब मालेगांव विस्फोट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा को एनआईए की विशेष कोर्ट में पेश किया गया. कड़ी सुरक्षा के बीच वह कोर्ट में पेश हुई. इस दौरान उन्होंने कोर्ट द्वारा किये गया सवालों के जवाब मुझे नहीं पता कहकर ही दिए.

29 सितंबर, 2008 को हुआ था मालेगांव विस्फोट
बता दें कि मालेगांव विस्फोट 29 सितंबर, 2008 को हुआ, जिसमें छह लोग मारे गए और कई लोग घायल हो गए. शुक्रवार की नमाज के बाद एक मस्जिद में एक मोटरसाइकिल पर बम विस्फोट हुआ था. इसमें 6 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हुए थे. इसमें प्रज्ञा ठाकुर की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी. इस मामले को लेकर प्रज्ञा 9 साल तक जेल में रह चुकी हैं.

प्रज्ञा ठाकुर (Pragya Thakur) ने चुनाव के दौरान मुंबई आतंकी हमलों के शहीद हेमंत करकरे (Hemant Karkare) पर उन्हें प्रताड़ित करने के आरोप लगाए थे. ठाकुर ने अपने विवादित बयान में कहा था कि उन्होंने ही करकरे को श्राप दिया था, जिसके कारण आतंकवादियों ने इस पुलिस अधिकारी की हत्या कर दी. निंदा के बाद प्रज्ञा ने इस बयान को वापस ले लिया था.

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गुजरात के सूरत से खरीदी बाइक से हुआ था विस्फोट
दरअसल, एटीएस चीफ हेमंत करकरे को मालेगांव धमाके के एक दिन बाद ही इस आतंकी हादसे का ‘ठोस सबूत’ मिल गया था, जिसके आधार पर उन्होंने प्रज्ञा ठाकुर को गिरफ्तार किया था. अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, 30 सितंबर 2008 को हुए मालेगांव धमाके के बाद घटनास्थल पर पहुंचे हेमंत करकरे को सबसे पहला सबूत मिला था, वह थी पीले रंग की एलएमएल फ्रीडम मोटरसाइकिल, जिसमें बम रखे गए थे. यह इस घटना का सबसे पहला सुराग था. हादसे की जांच शुरू करने के अगले एक महीने में ही एटीएस ने इस मोटरसाइकिल के खरीदार का पता लगा लिया था.

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एलएमएल फ्रीडम मोटरसाइकिल के इंजन नंबर E55OK261886 के आधार पर एटीएस ने यह पता लगा लिया था कि यह बाइक गुजरात के सूरत की एक एजेंसी से खरीदी गई थी. सिद्धी एजेंसी नामक डीलर ने यह बाइक सूरत में रहने वाली प्रज्ञा ठाकुर को बेची थी. प्रज्ञा ठाकुर उस समय इंदौर में थी, जब एटीएस ने उन्हें सम्मन भेजा. इसी सबूत के आधार पर एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे ने प्रज्ञा ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया. बाद में पूछताछ के दौरान प्रज्ञा ठाकुर ने एटीएस को लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय और स्वयंभू संत दयानंद पांडेय का नाम बताया था.