
Tanuja Joshi
हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक... तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी ... और पढ़ें
West Bengal Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने चुनाव नतीजों को लेकर बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख करने की बात कही है.
सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी ने अपने आवास पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के जीतकर आए विधायकों के साथ एक अहम बैठक की. इस बैठक में उन्होंने साफ कहा कि पश्चिम बंगाल की चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और जनादेश को प्रभावित किया गया है. उन्होंने इसे ‘छिना हुआ जनादेश’ बताते हुए इसे कानूनी रूप से चुनौती देने का फैसला किया है.
ममता बनर्जी ने संकेत दिए हैं कि वह जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सकती हैं. उनका मानना है कि चुनाव में हुई कथित अनियमितताओं की जांच जरूरी है और इसके लिए न्यायपालिका का सहारा लिया जाएगा. ये कदम उनके राजनीतिक रुख में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि अब वह सड़कों के साथ-साथ अदालत में भी अपनी लड़ाई लड़ने की रणनीति अपना रही हैं.
एक दिलचस्प मोड़ में, ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि वह और उनकी सहयोगी चंद्रिमा भट्टाचार्य समेत कुछ अन्य नेता फिर से अदालत में वकालत करते नजर आ सकते हैं. ये बयान दर्शाता है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस मुद्दे को केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी लड़ाई के रूप में भी देख रही है.
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि वह इस्तीफा नहीं देंगी. उन्होंने अपने पद पर बने रहने को विरोध का एक तरीका बताया है. इस रुख को अभिषेक बनर्जी ने भी समर्थन दिया. उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में पद पर बने रहना ही पार्टी का विरोध दर्ज कराने का तरीका है.
ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को भी खुली चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि अगर केंद्र चाहे तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है, लेकिन यह फैसला आधिकारिक तौर पर दर्ज होना चाहिए. इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और ज्यादा गरमा गया है और आने वाले दिनों में टकराव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पार्टी के सभी जीतकर आए विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में रहने के निर्देश दिए गए हैं. उन्हें कहा गया है कि किसी भी तरह की हिंसा या अशांति की स्थिति को तुरंत नियंत्रित करें और सीधे जिम्मेदारी लें. ये कदम दर्शाता है कि पार्टी किसी भी संभावित तनाव को नियंत्रित करने के लिए तैयार रहना चाहती है.
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