नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण अडवाणी से संसद स्थित उनके कक्ष में मुलाकात की और इसे एक ‘‘शिष्टाचार भेंट’’ बताया. दोनों के बीच बैठक करीब 20 मिनट तक चली. बनर्जी ने बैठक के बाद कहा, ‘‘मैं अडवाणी को लंबे समय से जानती हूं. मैं उनके स्वास्थ्य के बारे में जानने गई थी. यह एक शिष्टाचार भेंट थी.’’ Also Read - कोरोनावायरसः पुलिस ने खाली कराया शाहीन बाग, सौ दिन से चल रहा था CAA के खिलाफ प्रोटेस्ट

भाजपा से निलंबित नेता कीर्ति आजाद भी संसद में तृणमूल कांग्रेस के कार्यालय में ममता से मिलने पहुंचे. इसके अलावा कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल और समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव ने भी उनसे मुलाकात की. आजाद ने मुलाकात के बाद कहा, ‘‘विपक्ष को एक करने के उनके प्रयास सराहनीय हैं.’’ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के राजग गठबंधन के खिलाफ संसद में 14 विपक्षी दलों से मिलने की संभावना है. Also Read - बाबरी विध्वंस मामले में 24 मार्च को दर्ज होंगे आरोपियों के बयान

बता दें कि पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने चेतावनी दी कि असम में तैयार किए गए राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के अंतिम मसौदे में 40 लाख लोगों को शामिल नहीं किए जाने से देश में ‘‘खूनखराबा’’ और ‘‘गृह युद्ध’’ हो सकता है. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने ममता के इस बयान को सिरे से खारिज कर दिया. ममता ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक फायदे के लिए असम में लाखों लोगों को ‘‘राज्यविहीन’’ करने की कोशिश कर रही है. Also Read - मैं, मेरी पत्नी, मेरी पूरी कैबिनेट के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं हैं, क्या हमें निरोध केंद्र भेजा जाएगा: अरविंद केजरीवाल

बहरहाल, शाह ने ममता के आरोपों को खारिज करते हुए असम के एनआरसी को राष्ट्रीय सुरक्षा और भारतीयों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे के तौर पर पेश किया और सभी विपक्षी पार्टियों से साफ करने को कहा कि वे एनआरसी का समर्थन करती हैं या नहीं. ममता और कई विपक्षी पार्टियों ने मोदी सरकार पर यह हमला तब बोला है जब एक दिन पहले ही प्रकाशित किए गए एनआरसी के अंतिम मसौदे में 40 लाख से ज्यादा लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए. असम में रह रहे अवैध बांग्लादेशियों की पहचान के लिए एनआरसी तैयार करने की कवायद पिछले कई साल से चल रही है.