नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को दिल्‍ली में कई विपक्षी नेताओं से मुलाकात की. सुबह में वरिष्‍ठ भाजपा नेता लालकृष्‍ण आडवानी से मिलने के बाद उन्‍होंने संसद भवन में शिवसेना के संजय राउत से बातचीत की. इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा से मिलने गईं. दोपहर में उनकी मुलाकात कांग्रेस की वरिष्‍ठ नेता सोनिया गांधी और पार्टी अध्‍यक्ष राहुल गांधी से हुई. वे एक दिन पहले ही दिल्‍ली आईं ओर केंद्र में सत्‍तारूढ भाजपा सरकार के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने के लिए वे नेताओं से मिल रही हैं. Also Read - यूपी: रायबरेली में सोनिया गांधी के 'लापता' होने के लगे पोस्टर, संसदीय क्षेत्र से बाहर होने पर उठे सवाल

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समाजवादी पार्टी की जया बच्‍चन, कांग्रेस के अहमद पटेल और अन्‍य नेताओं से भी उनकी मुलाकात हुई. सोनिया और राहुल से मुलाकात के बाद उन्‍होंने कहा कि असम में एनआरसी के मुद्दे पर चर्चा के अलावा उन्‍होंने मौजूदा राजनीतिक हालात पर बातचीत की. उन्‍होंने इस बात पर भी विचार-विमर्श किया अगले साल लोकसभा चुनावों के दौरान साथ चुनाव लड़ने की क्‍या संभावनाएं हो सकती हैं.

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हालांकि इन मुलाकातों के बाद उनके विपक्षी गठबंधन की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्‍मीदवार बनने की चर्चा चल पड़ी है. इसको खारिज करते हुए उन्‍होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता केंद्र में भाजपा सरकार को हटाना है और इसके लिए विपक्ष को एक साथ आना चाहिए. उन्होंने संसद भवन में मीडिया से कहा, “मैं कोई नहीं हूं. मैं बहुत सामान्य कार्यकर्ता हूं. मुझे एक आम आदमी रहने दीजिए. मैं चाहती हूं कि इस सरकार, भाजपा सरकार को अवश्य ही जाना चाहिए. वे लोगों के साथ अधिकतम राजनीतिक प्रतिशोध और अत्याचार कर रहे हैं. इसलिए हम चाहते हैं कि सभी को संगठित होना चाहिए. चलिए, साथ मिलकर काम करते हैं. प्रधानमंत्री उम्मीदवार के बारे में मत सोचिए. देश के बारे में सोचिए.”

असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की मुखर विरोधी बनर्जी ने कहा कि 40 लाख लोग जिनके नाम सूची में नहीं हैं, वे इस देश के परिवार के सदस्य हैं. उन्होंने कहा, “वे लोग कई राज्यों से संबंध रखते हैं. वे लोग हमारे परिवार के सदस्य हैं. उन लोगों को यहां से जाने के लिए नहीं कहना चाहिए.”

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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बंगाल में 11 अगस्त को रैली करने के बारे में बयान दिया है. इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “उन्हें जाने दीजिए. उन्हें वहां 365 दिन जाने दीजिए. बंगाल सभी के लिए है. बंगाल सभी का स्वागत करता है. यह उनकी पार्टी की समस्या है.” अमित शाह द्वारा घुसपैठ का मुद्दा उठाने और उनके (ममता) खून-खराबे वाले बयान के बारे में पूछे जाने पर ममता ने कहा, “मैं यह कह रही हूं कि भाजपा जो कर रही है, उससे बहुत खून-खराबा होगा. वे लोग आग से खेल रहे हैं.”

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भाजपा के वरिष्ठ नेता एल.के. आडवाणी समेत विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के साथ मुलाकात पर उन्होंने कहा, “मैं सात बार संसद की सदस्य रही हूं. मैंने सभी से अच्छे संबंध बनाकर रखे हैं. यह एक शिष्टाचार भेंट थी.”