नई दिल्ली. भारतीय कैदी हामिद निहाल की पाकिस्तान से रिहाई नई दिल्ली के लगातार दबाव का नतीजा है. भारत ने पाकिस्तान की जेल में बंद अंसारी तक राजनयिक पहुंच देने के लिए 96 बार ‘नोट वरबल्स’ (राजनयिक तौर पर संवाद) जारी किया. आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी. मुंबई निवासी 33 वर्षीय अंसारी को पेशावर केंद्रीय कारागार में रखा गया था. उन्हें 15 दिसंबर 2015 को एक फौजी अदालत ने जेल की सजा सुनाई थी. अदालत की ओर से दी गई सजा पूरी होने पर उन्हें पाकिस्तानी जेल से रिहा कर दिया गया.

साल 2012 में कोहट में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों और स्थानीय पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद अंसारी लापता हो गए थे. उनकी मां फौज़िया अंसारी की बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर उच्च न्यायालय को सूचित किया गया कि वह पाकिस्तानी सेना की हिरासत में है और सैन्य अदालत में उनपर मुकदमा चलाया जा रहा है. अंसारी ने ऑनलाइन संपर्क के जरिये बनी महिला दोस्त से मिलने के लिए कथित रूप से अफगानिस्तान से पाकिस्तान में प्रवेश किया था.

दस्तावेज नहीं थे पूरे
उनकी जेल की सजा पिछले हफ्ते पूरी हो गई थी, लेकिन कानूनी दस्तावेज तैयार नहीं होने की वजह से वह भारत के लिए रवाना नहीं हो सके. गुरुवार को पेशावर उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को उनको वापस वतन भेजने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक महीने का वक्त दिया था. सरकारी सूत्रों ने बताया कि राजनयिक पहुंच के लिए और उनके खिलाए लगाए गए आरोपों पर स्पष्टता के लिए 96 बार ‘नोट वरबल्स’ जारी किए गए जिन पर भारत को संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली.

16 दिसंबर को पूरी हो गई थी सजा
सूत्रों ने बताया कि 16 दिसंबर को उनकी जेल की सजा खत्म हो रही थी, इसे देखते हुए भारत ने पिछले हफ्ते कई स्तरों पर अंसारी की रिहाई और जल्द से जल्द उन्हें भारत भेजने की मांग की. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने कहा ‘अंसारी को उसकी सजा पूरी होने के बाद रिहा किया गया और भारत भेजा रहा है.’ उन्होंने दावा किया कि अंसारी एक ‘भारतीय जासूस था जिसने अवैध तरीके से पाकिस्तान में प्रवेश किया था और वह राष्ट्र विरोधी अपराधों एवं फर्जी दस्तावेज बनाने में शामिल था.’