नई दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट ने चार साल के एक बच्चे के साथ अप्राकृतिक यौनाचार के दोषी व्यक्ति को मिली उम्रकैद की सजा को यह कहते हुए बरकरार रखा कि उसकी इस घृणित करतूत ने पीड़ित को शारीरिक चोट पहुंचाने के साथ ही उसको भावनात्मक रूप से तोड़ दिया होगा.

अदालत ने कहा कि 25 साल का दोषी व्यक्ति खुद भी एक छोटे बच्चे का बाप है, लेकिन ऐसा जघन्य अपराध करने का उसे जरा भी पछतावा नहीं हुआ. न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा और दोषी की अपील को खारिज कर दिया. निचली अदालत ने बच्चे के पड़ोस में रहने वाले इस व्यक्ति को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. पीठ ने गौर किया कि पीड़ित को इस शख्स ने चिकन-चावल का लालच देकर उसके साथ कुकर्म किया था.

हाईकोर्ट ने कहा, ‘ऐसी घृणित करतूत कर याचिकाकर्ता (दोषी) ने न सिर्फ पीड़ित को शारीरिक क्षति पहुंचाई, बल्कि उससे भी ज्यादा इस हरकत ने उसको भावनात्मक रूप से तोड़ दिया होगा, जो आने वाले लंबे समय तक उसके दिलो-दिमाग पर रहेगा.’

अदालत ने कहा कि इस वहशत ने पीड़ित को ऐसा सदमा पहुंचाया होगा कि वह किसी वयस्क पर भरोसा करने में झिझकेगा या किशोरावस्था में अपना जीवन आनंद एवं स्वतंत्रता से नहीं जी पाएगा. अदालत ने कहा कि जब कोई अंदर से टूट जाता है और वह भी इतनी कम उम्र में तो बच्चे का समग्र स्वस्थ विकास निश्चित तौर पर अवरुद्ध हो जाता है.