शिमला: दस विधानसभा सीटों के साथ हिमाचल प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े जिले मंडी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की जंग पर 54 साल बाद जीत हासिल की. कांगड़ा और कुल्लू से सांस्कृतिक करीबी रखने वाले मंडी जिले का कोई विधायक कभी मुख्यमंत्री नहीं बना. Also Read - Bihar Assembly Election 2020: भाजपा के मेनिफेस्टो पर मचा बवाल, तो BJP ने किया पलटवार

कांग्रेस नेता करम सिंह ने 1952 से 1972 तक चाचिओट से पांच बार विधानसभा चुनाव जीता और 1963 तथा 1967 में मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार थे लेकिन वह यह मौका चूक गये और डॉक्टर वाई एस परमार मुख्यमंत्री बन गये थे. सुखराम एक अन्य वरिष्ठ कांग्रेसी नेता थे जो राज्य में सर्वोच्च पद के लिये दावेदार थे. वह भी कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाए. यह भी पढ़ें: जयराम ठाकुर बनेंगे हिमाचल प्रदेश के नए मुख्यमंत्री Also Read - बिहार में मुफ्त वैक्सीन बांटने के वादे पर राहुल गांधी का बीजेपी पर हमला, RJD बोली- इसमें भी चुनावी सौदेबाजी, छी-छी

 भाजपा ने इस बार जिले में चौंकाने वाला प्रदर्शन किया और यहां की 10 विधानसभा सीटों में से नौ पर जीत हासिल की. भगवा पार्टी के मुख्यमंत्री पद के चेहरे रहे प्रेम कुमार धूमल के चुनाव हार जाने से इस पद के लिये दावे का विकल्प खुल गया था.

अंतत: चाचिओट या पुनर्सीमांकन के बाद सेराज एक बार फिर इस पद की दौड़ के लिये सामने आया और यहां से पांच बार के विधायक जयराम ठाकुर अब 27 दिसंबर को प्रदेश के 14वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे. Also Read - Bihar Assembly Election: बिहार में कोरोना वैक्सीन मुफ्त बांटने के वादे से बवाल, बीजेपी के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत