मुख्यमंत्री पद की लड़ाई में मंडी को 54 साल बाद मिली जीत

कांगड़ा और कुल्लू से सांस्कृतिक करीबी रखने वाले मंडी जिले का कोई विधायक कभी मुख्यमंत्री नहीं बना.

Updated: December 25, 2017, 9:08 AM IST

शिमला: दस विधानसभा सीटों के साथ हिमाचल प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े जिले मंडी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की जंग पर 54 साल बाद जीत हासिल की. कांगड़ा और कुल्लू से सांस्कृतिक करीबी रखने वाले मंडी जिले का कोई विधायक कभी मुख्यमंत्री नहीं बना.

कांग्रेस नेता करम सिंह ने 1952 से 1972 तक चाचिओट से पांच बार विधानसभा चुनाव जीता और 1963 तथा 1967 में मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार थे लेकिन वह यह मौका चूक गये और डॉक्टर वाई एस परमार मुख्यमंत्री बन गये थे. सुखराम एक अन्य वरिष्ठ कांग्रेसी नेता थे जो राज्य में सर्वोच्च पद के लिये दावेदार थे. वह भी कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाए. यह भी पढ़ें: जयराम ठाकुर बनेंगे हिमाचल प्रदेश के नए मुख्यमंत्री

 भाजपा ने इस बार जिले में चौंकाने वाला प्रदर्शन किया और यहां की 10 विधानसभा सीटों में से नौ पर जीत हासिल की. भगवा पार्टी के मुख्यमंत्री पद के चेहरे रहे प्रेम कुमार धूमल के चुनाव हार जाने से इस पद के लिये दावे का विकल्प खुल गया था.

अंतत: चाचिओट या पुनर्सीमांकन के बाद सेराज एक बार फिर इस पद की दौड़ के लिये सामने आया और यहां से पांच बार के विधायक जयराम ठाकुर अब 27 दिसंबर को प्रदेश के 14वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे.

संबंधित खबरे

Add India.com as a Preferred Source Add India.com as a Preferred Source

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें India Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.