नई दिल्ली: भारत की आजादी की पहली शुरुआत यानी स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत 1857 में हुई थी. यह शुरुआत मंगल पांडे ने की थी. दरअसर मंगल पांडे ब्रिटिश सेना का हिस्सा थे. लेकिन एक बार उन्हें सूचना मिल की जिस कारतूस को वो बंदूक के लिए इस्तेमाल करते हैं. उसपर गाय की चमड़ी का इस्तेमाल किया जाता है. दरअसल उस वक्त के कारतूस को बंदूक में भरने के लिए कारतूस के उपर लगे एक कवच को मुंह से नोंच कर हटाना पड़ता था. यही वजह है कि मंगल पांडे इस बात पर नाराज हो गए. ब्रिटिश अधिकारियों से बात करने के बावजूद भी जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्होंने ब्रिटिश सेना के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया. यहीं से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पहली लड़ाई और पहली शुरुआत मानी जाती है. Also Read - International Labour Day 2020: मई दिवस की क्या है अहमियत, आखिर कब हुई थी इसकी शुरुआत

बता दें कि आज 8 अप्रैल है आज ही के दिन आजादी की पहली चिंगारी जलाने वाले मंगल पांडे को फांसी दे दी गई थी. देश की आने वाली पीढ़ियां आजाद हवा में सांस ले सकें और उनका भविष्य सुरक्षित हो, इसलिए मंगल पांडे और उनके जैसे कई नौजवानों ने अपने वर्तमान की कुर्बानी दे दी. 8 अप्रैल का दिन इन्हीं को समर्पित है. देश में धधकती आजादी की आंच पूरी दुनिया तक पहुंचाने के लिए भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त जैसे आजादी के परवानों ने आठ अप्रैल 1929 को दिल्ली के सेंट्रल एसेंबली हॉल में बम फेंका था. इस बम धमाके का मकसद किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की तरफ दुनिया का ध्यान आकृष्ट करना था. Also Read - World Health Day 2020: आखिर क्यों मनााया जाता है विश्व स्वास्थ्य दिवस, जानें इतिहास और उद्देश्य

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1857 : ब्रिटिश सरकार के खिलाफ बगावत की चिंगारी भड़काने वाले बैरकपुर रेजीमेंट के सिपाही मंगल पांडेय को फांसी दे दी गई.

1894 : भारत के राष्ट्रीय गीत बंदे मातरम के रचयिता बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का कलकत्ता में निधन.

1929 : क्रांतिकारी भगत सिंह और बटुकेश्‍वर दत्त ने दिल्ली असेंबली हॉल में बम फेंका और गिरफ्तारी दी.

1950 : भारत और पाकिस्तान के बीच लियाकत-नेहरू समझौता. यह समझौता दोनों देशों में रह रहे अल्पसंख्यकों के अधिकारों को सुरक्षित रखने और भविष्य में दोनों देशों के बीच युद्ध की संभावनाओं को ख़त्म करने के मकसद से किया गया था.

1973 : स्पेन के चित्रकार पाब्लो पिकासो का निधन. इन्हें 20वीं शताब्दी का संभवत: सबसे प्रभावी चित्रकार माना जाता है.

2013 : ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गेरेट थैचर का लंदन में निधन . वह ग्रेट ब्रिटेन ही नहीं किसी भी यूरोपीय देश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और 20वीं शताब्दी में ब्रिटेन की एकमात्र प्रधानमंत्री थीं, जिन्होंने तीन बार लगातार यह पद संभाला.

जापान में सदियों से इस दिन को बौद्ध धर्म को मानने वाले बुद्ध के जन्मदिन के तौर पर मनाते हैं.

(इनपुट-भाषा)