दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को कहा कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय रखा जाना चाहिए। सिसोदिया ने केंद्र सरकार से शिक्षा के लिए बजट बढ़ाने को भी कहा।

सिसोदिया का यह प्रस्ताव केंद्रीय शिक्षा सलाहकार समिति की बैठक के दौरान सामने आया, जिसमें केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर तथा कई राज्यों के शिक्षा मंत्रियों ने हिस्सा लिया। सिसोदिया ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे देश में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय नहीं है। हमारे यहां वर्तमान में मानव संसाधन विकास मंत्रालय है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय रखा जाना चाहिए, क्योंकि मानव संसाधन विकास केवल इसका हिस्सा भर है।”

बैठक के दौरान सिसोदिया ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के दायरे में उन बच्चों को भी लाने का प्रस्ताव किया, जो छह से 14 साल उम्र के दायरे में नहीं आते हैं। सिसोदिया ने नो डिटेंशन पॉलिसी को पूरी तरह खत्म करने की मांग एक बार फिर दोहराई। नो डिटेंशन पॉलिसी के तहत, पासिंग ग्रेड न पाने के बावजूद आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थी स्वत: अगली कक्षा में चले जाते हैं। यह भी पढ़ें: लोन लेने के लिए संभल कर करना होगा सोशल मीडिया का इस्तेमाल

बैठक के दौरान सिसोदिया ने अर्ली चाइल्डहुड लर्निंग (नर्सरी शिक्षा) पर ध्यान बढ़ाने की पेशकश की और शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए एक विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग की।