नई दिल्लीः भारत-चीन के सैनिकों के बीच लद्दाख के गलवान घाटी (Ladakh’s Galwan Valley) में हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए. ऐसे में पूरे देश में चीन के खिलाफ गुस्से का माहौल है. इस बीच देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह (Former Prime Minister Manmohan Singh) ने भी चीन के खिलाफ उचित कार्रवाई की अपील की है. पूर्व पीएम ने कहा कि अब देश चीन की धमकियां और दबाव के सामने झुकेगा नहीं और न ही अपनी अखंडता से कोई समझौता स्वीकार करेगा. मोदी सरकार (Modi Government) से चीन को जवाब देने की मांग करते हुए डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा कि – ‘लद्दाख सीमा विवाद में शहीद हुए जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए. यह वह समय है जब पूरे राष्ट्र को एकजुट होने और संगठित होकर चीन को इस दुस्साहस के लिए जवाब देना होगा.’ Also Read - अब अमेरिका से भिड़ा चीन, बोला- एक हजार साल से दक्षिण चीन सागर हमारा है

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने आगे कहा, ’15-16 जून को गलवान घाटी में भारत के 20 जवानों ने सर्वोच्च कुर्बानी दी. देश के इन सपूत जवानों ने अपनी अंतिम सांस तक देश की सेवा और रक्षा की. उनके इस सर्वोच्च त्याग और बलिदान के लिए देश उनका और उनके परिवार का ऋणी है. देश इन जवानों का और उनके परिवार का यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देगा.’ Also Read - पूर्वी लद्दाख विवाद: भारत-चीन के आर्मी कमांडरों के बीच आज चुशुल में हाईलेविल मीटिंग

उन्होंने आगे कहा- ‘आज हम इतिहास के सबसे नाजुक मोड़ पर खड़े हैं. जहां हमारी सरकार के कदम तय करेंगे कि आने वाली पीढ़ी हमारा आकलन कैसे करेगी. जो इस समय देश का नेतृत्व कर रहे हैं, उनके कंधों पर कर्तव्य का बड़ा दायित्व है. हमारे प्रजातंत्र में देश के प्रधानमंत्री का यह दायित्व है कि वह सपूतों के बलिदान का बदला लें. प्रधानमंत्री को हमेशा अपने ऐलान के दौरान अपने शब्दों को लेकर सावधान रहना चाहिए और इन शब्दों के देश की सुरक्षा और भूभागीय हितों पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना चाहिए.’ Also Read - देश में आर्थिक संकट पर शरद पवार बोले- भारत को इस समय एक मनमोहन सिंह की जरूरत